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अमेरिका में भारतीय मूल के कई ऐसे लोग रहते है जिन्होंने अमेरिका का नाम रोशन कर रखा है और नि:सदेंह उनकी काबिलियत की वजह से कहीं न कहीं भारत का नाम भी रोशन हुआ है। उदाहरण के तौर पर गूगल के सीईओ सुदंर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नारायणा नडेला, मास्टर कार्ड सीईओ अजय पाल सिंह बग्गा जैसे कई लोग है जिन्होंने अपनी अनोखी काबिलियत से दुनिया को परिचित कराया है। पुरुषों के अलावा भारतीय मूल की महिलाएं भी अमेरिका में अपना दम खम दिखाने में पीछे नहीं है। हाल ही में भारतीय मूल की महिला निकी हेली ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थायी सदस्य के रूप में पदभार संभाला था। जिसके बाद पूरे हिंदूस्तान को भारत के उपर गर्व हुआ था। लेकिन निकी हेली का कहना है कि भारत में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबलें में काफी कम मौके मिलते है जिसकी वजह से किसी बड़े मुकाम को हासिल नहीं कर पाती। निकी हेली ने कहा कि इसी वजह से उनकी मां को महिला होने के कारण भारत में न्यायधीश नहीं बनने दिया गया। निकी हेली अमेरिका में खुद के गवर्नर बनने और यूएन में अमेरिकी स्थायी सदस्य होने पर बड़ा गर्व जताते हुए भारत पर तंज कसा।

निकी हेली का मानना है कि भारत में महिलाओं को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के मौके नहीं मिलते। शायद निकी हेली यह भूल गई अमेरिका में आजादी के ढ़ाई सौ साल बाद भी आज तक कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी है पर भारत में आजादी के 60 साल बाद ही श्री मति प्रतिभा देवी पाटिल पहली महिला राष्ट्रपति रह चुकी है। इससे भी पहले आजादी के सिर्फ 20 साल बाद ही श्रीमति इंदिरा गांधी भारत की पहली प्रधानमंत्री का पद बड़ी ही सशक्तता और प्रबलता से निभाया जिसकी मिसाल आज तक दी जाती है।

इतना ही नहीं 17वीं शताब्दी में जब अमेरिका को आजादी मिली थी उसी वक्त भारत अंग्रेजों का गुलाम बना था लेकिन फिर भी उतनी विषम परिस्थियों में भारत की वीर रानी लक्ष्मी बाई से लेकर सरोजनी नायडू तक अनेकों महिलाओं ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और देश को आजादी दिलाई। इसके अलावा मीरा कुमार, सुमित्रा महाजन और कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने भारत का गौरव दुनिया भर में बढ़ाया है।

जबकि निकी हेली ने कहा कि उनकी मां को महिला होने की वजह से जज बनने नहीं दिया गया लेकिन शायद उन्हें नहीं पता कि भारत में आजादी से पहले और निकी के माता-पिता के भारत छोड़ने से करीब दो दशक पहले अन्ना चांडी त्रावनकेर में जज रह चुकी थीं। इसके अलावा देश के आजाद होने के बाद चांडी 1948 में जिला जज और 1959 में हाईकोर्ट के लिए पदोन्नत हुई थीं।

भारत में महिलाएं भले ही पर्दे के पीछे रहती हो और लेकिन फिर भी अपनी भारतीय संस्कृतियों का पालन करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के ढ़ेरो मौके मिले हैं जहां उन्होंने कामयाबी भी हासिल की है। अमेरिका जैसे देशों द्वारा भारत को महिलाओं के मान-सम्मान और मौके का आईना दिखाने से पहले भारत का इतिहास पढ़ लेना चाहिए।

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