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लुधियाना में जमीन अधिकरण का मुआवजा पाने के लिए एक किसान ने कई सालों तक लड़ाई लड़ी, और अब जो फैसला आया उसने सब को हैरान कर दिया। कोर्ट ने इस केस पर फैसला सुनाते हुए पूरी की पूरी ट्रेन ही किसान के नाम कर दी। ये फैसला थोडा हैरान करने वाला है लेकिन हकीकत यही है।

क्या है पूरा मामला:-

मुआवज़े का ये मामला 2007 में लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के निर्माण से जुड़ा हुआ है। लुधियाना के काटना गाँव में  रह रहे 45 वर्षीय सम्पूरण सिंह की जमीन साल 2007 में रेलवे ने अधिग्रहित कर ली थी लेकिन किसान को इसके बदले पूरा मुआवजा नहीं दिया गया। किसान कई सालों से मुआवजे के लिए लड़ाई लड़ता रहा, लेकिन रेलवे ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इस मामले में जब रेलवे ने कोर्ट के आदेशों को भी नहीं सुना तो कोर्ट ने अमृतसर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन को ही किसान के नाम कर दिया और उसे ट्रेन को घर ले जाने तक की इजाजत दे दी गई। ये फैसला लुधियाना के डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज जसपाल वर्मा ने सुनाया।

बता दें रेलवे को किसान सम्पुरण को 1 करोड़ 47 लाख अदा करने थे,  लेकिन रेलवे ने सिर्फ 42 लाख रुपये ही दिए। जब पूरा मुआवजा नहीं मिला तो सम्पुरण ने साल 2012 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तब जा कर इस मामले में सुनवाई शुरू हुई और 2015 में कोर्ट ने फैसला सुना दिया लेकिन रेलवे ने कोर्ट के फैसले को न मानते हुए इस रकम की अदायगी नहीं की। रेलवे का ऐसा रवैया देख कोर्ट ने पूरी ट्रेन ही किसान के नाम कर दी।

कोर्ट के आदेश के बाद किसान सम्पूरण सिंह तकनीकी रूप से स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस-12030 के मालिक बन गए हैं। इसके बाद वो ट्रेन पर कब्जा करने के लिए अपने वकील के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचे लेकिन रेलवे के सेक्शन इंजीनियर ने ट्रेन को किसान के कब्जे में जाने से रोक दिया और बताया गया कि ये ट्रेन कोर्ट की संपति है। इस पर सम्पूरण सिंह ने ड्राइवर को कोर्ट का नोटिस थमाया और ट्रेन को उसके समयनुसार जाने दिया। सम्पूरण का कहना था अगर वो ट्रेन को रोकता तो इससे ट्रेन में सवार मुसाफिरों को दिक्कत होती।

इस मामले में रेलवे के डिवीजनल मैनेजर अनुज प्रकाश का कहना है, ‘किसान को मुआवजे में दी जाने वाली रकम को लेकर कुछ विवाद था उसे सुलझाने की कोशिश की जा रही है।’ उन्होंने ये भी कहा कि अदालत के इस आदेश की समीक्षा लॉ मिनिस्ट्री कर रही है। अनुज का कहना है, ‘पता नहीं याचिका करने वाला 300 मीटर की ट्रेन का क्या करेगा। क्या वो इसे घर ले जा सकता है?’

बहरहाल,  इस मामले में आगे क्या कार्यवाही होती है ये तो वक्त बतायेगा लेकिन कोर्ट के इस अजीब फैसले की वजह से इस केस को सालों-साल तक याद रखा जायेगा।

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