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दो दिन में गुजरात के छह पार्टी विधायकों द्वारा इस्तीफे देने से घबराई कांग्रेस ने शुक्रवार रात अपने 44 विधायकों को बेंगलुरु में सुरक्षित ठिकाने पर भेज दिया। अहमदाबाद से देर रात लगभग 44 विधायक विमान से  बेंगलुरु पहुंचे। एयरपोर्ट से इन सभी विधायकों को सीधा रिजार्ट ले जाया गया। बेंगलूरू में इन विधायकों को एक रिजार्ट में कड़ी सुरक्षा के साथ रखा गया है।

बता दें कि पहले तो देर शाम तक, करीब 11 कांग्रेसी विधायक राजकोट में एकांत जगह पर रहे, जबकि 15 एमएलए यहां से करीब 240 किलोमीटर दूर वरसाड में एक रिसॉर्ट में थे, जहां पार्टी के प्रदेश प्रमुख भारत सोलंकी ने उनके साथ बैठक की।

दरअसल आठ अगस्त को होने वाले गुजरात में राज्यसभा चुनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा कांग्रेस विधायकों को रुपयों का लालच दे रही है और ना मानने पर उन्हें धमकाया जा रहा है, फर्जी मुकदमों में फंसाने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा ने जहां अमित शाह और स्मृति ईरानी को राज्यसभा सीट के लिए मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को राज्यसभा का टिकट दिया है और  इस दल बदल से पटेल के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

माना जा रहा है वाघेला के प्रति वफादार कुछ और विधायक इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि अन्य अगले सप्ताह कांग्रेस के उम्मीदवार के खिलाफ वोट कर सकते हैं जैसा कि राष्ट्रपति चुनाव में हुआ। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के 11 विधायकों ने मीरा कुमार की बजाय भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के लिए मतदान किया था।

इसके अलावा एक दर्जन और विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही 182 सदस्यीय गुजरात विस में कांग्रेस की सदस्य संख्या 57 से घटकर 51 हो गई है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की जीत खतरे में पड़ गई है।

इससे पहले दिन में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि वह कांग्रेस विधायकों को धन व बाहुबल से छीनने को लेकर भाजपा के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करे।

वहीं इस पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि ‘गुजरात में भाजपा ने खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। आपने यह नौटंकी देखी है… गुजरात में भाजपा की नीति है कि सभी कानूनों को तोड़कर जैसे भी हो सत्ता में बने रहा जाए’। सिंघवी ने कहा कि पार्टी अपने सारे विकल्प खुले रख रही है और विधायकों को चेतावनी दी कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत वे छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएंगे।

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