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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एएनआई ए़डिटर स्मिता प्रकाश पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को लेकर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने स्मिता प्रकाश को ‘लचीले स्वभाव का पत्रकार’ बताते हुए कहा था कि इंटरव्यू में वो सवाल भी खुद ही पूछ रही थीं और जवाब भी खुद दे रही थीं। इस पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने नाराजगी जताई है और कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान पर माफी की मांग की है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि पत्रकारों को स्वस्थ और सभ्य तरीके से की गई आलोचना से बचाव का कोई दावा नहीं करना चाहिए। लेकिन साथ ही, पत्रकारों को डराना और बदनाम करना एक पसंदीदा रणनीति बन गई है। हमने राजनीति वर्ग के लोगों को इसका इस्तेमाल करते देखा है।

पिछले कुछ समय में, बीजेपी और AAP के शीर्ष नेताओं ने अभद्र तरीके से पत्रकारों के लिए प्रेस्टीट्यूट, न्यूज-ट्रेडर्स, बाजारू या दलाल जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि अब इस पर विराम लग जाना चाहिए।

एडिटर्स गिल्ड के अलावा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन्स प्रेस कॉर्प्स और प्रेस असोसिएशन ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा, ”पूर्व केंद्रीय मंत्री के कहे गए ‘प्रेस्टीट्यूट’ और हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से कहे गए ‘लचीले’ शब्दों का इस्तेमाल गलत है.”

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट से जुड़े दिल्ली जर्नलिस्ट असोसिएशन ने मांग की है कि कांग्रेस पार्टी से इस पर माफी मांगे और अफसोस जताए। असोसिएशन ने कहा, ”एक पत्रकार के बारे में इसलिए बुरा कहना, क्योंकि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी राजनेता का इंटरव्यू किया, ये खराब है।”

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2 जनवरी को राफेल मुद्दे पर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू को नियोजित बताया था। राहुल गांधी ने कहा था, ”आपने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू देखा कल… वो सवाल भी खुद कर रही थीं, प्रधानमंत्री का जवाब भी दे रही थीं।”

राहुल गांधी के इस बयान पर स्मिता प्रकाश ने पलटवार करते हुए ट्वीट कर कहा था कि वो पीएम पर हमला करना चाहते हैं तो करें, लेकिन उनका अपमान न करें। स्‍म‍िता प्रकाश ने लिखा, ”डि‍यर मिस्टर राहुल गांधी, अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर आपने मुझ पर हमला किया। मैं सवाल पूछ रही थी, जवाब नहीं दे रही थी। देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष से ऐसी उम्मीद नहीं थी।”

राहुल गांधी के बयान पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी उन्हें घेरा था। कांग्रेस अध्यक्ष को आड़े हाथों लेते हुए जेटली ने ट्विटर पर लिखा था, “अभिव्यक्ति की आजादी की बात करने वाली ब्रिगेड अब कहां है? इमरजेंसी लागू करने वाली तानाशाह के पोते ने एक स्वतंत्र एजेंसी की पत्रकार पर सवाल खड़े कर अपना डीएनए दिखा दिया है।’’

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