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राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण को लेकर सियासी पारा गर्म है। असम में 40 लाख लोगों का क्या होगा। इसकी चर्चा चल रही है। आरोप प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। ऐसे में चुनाव आयोग भी अलर्ट है। NRC पर चुनाव आयोग ने कमर कस ली है। रिपोर्ट पर राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी इस मामले में अपना दृष्टिकोण रखा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आयोग की एनआरसी की रिपोर्ट पर पैनी नजर है। उन्‍होंने कहा कि आयोग के अफसर एनआरसी से संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ओमप्रकाश रावत इस बारे में खासे निश्चिंत है। ओम प्रकाश रावत का कहना है कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स के ड्राफ्ट के तहत आये 40 लाख लोगों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर कोई असर नहीं होगा।

सीईसी रावत ने कहा कि चार जनवरी 2019 को मतदाता सूची का प्रकाशन होना है। हमारे पास काफी वक्त है। हमने मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स के स्टेट कोऑर्डिनेटर से संपर्क करते रहें। हमने असम के सीईओ से एनआरसी से तालमेल कर हफ्ते भर में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में सीईओ तमाम आंकड़े देंगे कि 40 लाख लोगों में कितने बच्चे हैं। कितने नये वोटर की उम्र के हैं जो अभी-अभी 18 साल की दहलीज पार कर चुके हैं औऱ कितने अधेड़ या बुजुर्ग हैं। महिलाओं और पुरुषों का भी डाटा हमने तलब किया है। यानी एक कंप्लीट डाटा हमारे पास होगा। यानी समय रहते हमारे आगे तस्वीर साफ हो जाएगी।

रावत ने ये भी कहा कि फर्ज कीजिये कहीं 4 जनवरी 2019 से तक एनआरसी अपना डाटा कलेक्शन कंप्लीट नहीं कर पाया तो हमारी टीम अपने सिस्टम से पूरा डाटा तैयार कर लेगी। जितने लोगों ने अपने दस्तावेज और अर्जी हमारे ERO यानी इलेक्टोरल रोल ऑफिसर के दफ्तर में जमा करा देंगे तो उनकी तसदीक के बाद हम उनको वोटर लिस्ट में दर्ज कर लेंगे।

                                                                                                                ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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