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भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनावों के दौरान लागू की जाने वाली आचार सहिंता को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि, किसी भी विधानसभा के समय से पहले भंग हो जाने पर राज्य में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी और यह नई सरकार के गठन तक जारी रहेगी। गुरुवार को चुनाव आयोग के निर्देश जारी करते हुए कहा कि, पुरानी विधानसभा के भंग होने से लेकर नई सरकार के गठन तक राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू रहेगी। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद कार्यवाहक मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री कोई भी अहम नीतिगत फैसले नहीं ले सकता है।

चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे हैं। इन पत्र में कहा गया है कि आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रावधान भाग-8 के अनुसार सम्बन्धित राज्य की विधान सभा भंग होते ही वहां आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी और नई विधान सभा के गठन तक लागू रहेगी। अभी आचार संहिता तब लागू होती है जब चुनाव तारीख़ों का ऐलान कर दिया जाता है।

हाल ही में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने विधानसभा भंग की थी। उन्होंने चुनाव आयोग से जल्द ही चुनाव कराने की मांग की थी। जिसके मद्देनजर विधानसभा भंग होने के बाद चुनाव आयोग ये बड़ा फैसला लिया है। EC के इस फैसले के बाद तेलंगाना में आचार संहिता लागू मानी जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे में गैर आधिकारिक उद्देश्यों के लिए आधिकारिक संसाधनों के इस्तेमाल सहित अन्य प्रतिबंध कार्यवाहक सरकार और केंद्र सरकार के मंत्रियों एवं अन्य अधिकारियों पर बाध्यकारी होंगे। बता दें कि अभी तेलंगाना में चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग ने कहा, विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में साल 1994 में एसआर बोमाई केस में आए हाईकोर्ट के फैसले के हिसाब से व्यवस्था लागू होगी। कोर्ट के फैसले के मुताबिक राज्य में कार्यवाहक सरकार सिर्फ सरकारी कामकाज ही कर सकेगी। उस किसी भी तरह की योजना की घोषणा करने का अधिकार नहीं होगा। ऐसे में इस फैसले का सबसे ज्यादा असर तेलंगाना पर होगा, जहां मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बीते 6 सितंबर को ही विधानसभा भंग कर दी थी।

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