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पतंजली का कारोबार दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और इसके विस्तार में बाबा रामदेव कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। बुधवार को पतंजलि और उत्तराखंड सरकार के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी। इस बैठक में पांच योजनाओं पर एकसाथ काम करने को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और बाबा रामदेव की आपसी सहमति बनी। इसके तहत राज्य को जैविक कृषि प्रदेश बनाने, मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत बढ़ाने, आयुष ग्रामों, गोधाम की स्थापना और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम किया जाएगा। इन योजनाओं से रोजगार के कई अवसर बढ़ने के अनुमान है। साथ ही किसानों को बहुत बड़ा फायदा मिलने का भी अनुमान है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों से एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कृषि उत्पादन खरीदेगा।

इस बाबत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ये सारे सेक्टर राज्य के लिए बड़े महत्वपूर्ण हैं और यह राज्य की समृद्धि और खुशहाली के लिहाज से उचित हैं। उन्होंने कहा कि इन पर विचार-विमर्श तो हो चुका है, बस इनको धरातल पर लाने की जरूरत है। सीएम रावत ने कहा कि जड़ी बूटी, औद्योगिक, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से लोगों की आय बढ़ाई जाएगी। इससे न केवल राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि पलायन भी रोका जा सकेगा। उन्होंने कहा कि एक माह में इसकी समीक्षा की जाएगी।

वहीं बाबा रामदेव ने कहा कि राज्य में एक विशाल गोधाम बनाएंगे, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जाएगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जाएगा। सरकार और पतंजलि के बीच राज्य में पैदा होने वाले 5 हजार कुंतल ऊन को पतंजलि द्वारा खरीदने पर भी सहमति बनी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के विकास के लिए सरकार कड़े और साहसिक फैसले लेगी। विकास योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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