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मोदी से लेकर योगी सरकार किसानों को हर तरह की मदद मुहैया कराने के दावे करती है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक किसानों के हितों में नीतियां बनाने के भी दावे करती हैं। लेकिन हकीकत में किसानों को क्या कुछ सुविधाएं मिल रही है। ये भदोही जिले के एक किसान के दर्द से समझा जा सकता है। इस किसान को बिजली विभाग ने इस कदर परेशान कर दिया है कि किसान ने अपनी एक आंख और किडनी बेचने का एलान कर प्रशासन को सकते में डाल दिया है।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के डीघ ब्लॉक के बेरासपुर गांव निवासी किसान शिव लोलारक तिवारी सरकारी हाकिमों और मुलाजिमों की घोर लापरवाही के जीता जागता उदाहरण हैं। कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई करने वाले शिव लोलारक ने नौकरी की बजाय खुद की खेती किसानी करने का फैसला किया। बारिश और सिंचाई के प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहने की बजाय उन्होंने ट्यूबवेल का बोर कराया। पैसे नहीं थे तो केसीसी से पैसे लिए। बिजली के कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर के लिए बिजली विभाग में 32 हजार रुपये भी जमा करा दिए। वहीं से इनकी दुर्गती शुरू हो गई।

बिजली विभाग ने न कनेक्शन लगाए और ट्रांसफॉर्मर, नतीजा शिव लोलारक की फसल बरबाद हो गई और वो कर्ज में डूब गए। बार-बार बिजली विभाग के चक्कर काटते-काटते उब गए किसान ने अब सोशल मीडिया पर अपनी एक आंख और किडनी बेचकर कर्ज उतारने का एलान किया है। किसान के एलान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने लीपापोती की कार्यवाही शुरू कर दी। डीएम ने जब इस बारे में जानकारी मांगी तो विभाग ने उन्हें भी गुमराह कर दिया।

बिजली विभाग ने डीएम को जानकारी दी कि किसान ने एक महीने पहले पैसे जमा कराए हैं। जबकि किसान ने अप्रैल में ही पैसे जमा करा दिए थे। बहरहाल जिलाधिकारी ने जल्द से जल्द किसानों के बिजली कनेक्शन देने के निर्देश दिए हैं। नेताओं से लेकर नौकरशाहों तक के पेट भरने वाले किसानों के प्रति सरकारी विभागों का ये रवैया कोई नया नहीं है। बिजली विभाग में किस तरह काम होता है। ये भी किसी से छिपा नहीं है। अगर मालदार पार्टी बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करते हैं तो उनके यहां आनन फानन में कनेक्शन लगा दिए जाते हैं। ऐसे में डीएम के निर्देश का कितना असर होता है देखना दिलचस्प होगा।

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