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मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के चिचोली ब्लाक के एक गांव में पशु प्रेम की अनोखी मिसाल देखने को मिली है। चूड़िया गांव के एक किसान ने पिछले 25 साल से अपने परिवार के ‘सदस्य’ की तरह रह रही एक भैंसे की तेरहवीं में सोमवार को पूरे गांव को भोजन कराया। किसान परिवार की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भैसे राजाजी की मौत होने से पूरे परिवार में मातम छा गया।

किसान मुसरू यादव ने राजाजी नाम के इस भैसे की 30 मई को मौत हो जाने के बाद उसकी अंतिम क्रिया गौतीर्थ नालादेव बीजादेही में विधि विधान के साथ संपन्न कराई। इसके बाद तेहरवीं कार्यक्रम के लिए शोक संदेश छपवाया और पूरे गांव के अलावा आसपास वितरित किया। सोमवार को कार्यक्रम हुआ। इसमें ग्रामीणों ने भैंसे की फोटो पर पुष्प चढ़ाने के साथ श्रद्धांजलि भी दी।

चूड़िया गांव में मात्र ढाई एकड़ जमीन के मालिक मुसरू यादव ने बताया, कि वह मजदूरी करने के लिए दूसरे किसानों के खेतों में जाता था। करीब 25 साल पहले 25 माह के भैस के बच्चे को घर लाया और उसका पालन पोषण किया। जब वह युवा अवस्था में पहुंचा तो प्रजनन के कार्य से परिवार को अच्छी आय होने लगी। अच्छी देखभाल के कारण दूर-दूर के गांवों से लोग अपनी भैसों को प्रजनन के लिए लेकर आने लगे और मुसरू यादव के परिवार को अतिरिक्त आय होने लगी थी। मुसरू ने बताया कि राजाजी ने ही परिवार को आर्थिक संकट से उबारा था और इसी के कारण श्रद्घांजलि देकर गांव को भोज कराया है।

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