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एयर इंडिया कर्ज के बोझ तले दबा है। ऐसे में एयर इंडिया ने 30,000 करोड़ का वर्किंग कैपिटल लोन एक बार में माफ करने का एविएशन मिनिस्ट्री का सुझाव दिया था। लेकिन एविएशन मिनिस्ट्री के प्रस्वाव को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। हालांकि कंपनी के लिए राहत पैकेज पर अभी भी वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है। वहीं एविएशन मिनिस्ट्री ने दावा किया कि वित्त मंत्रालय ने वर्किंग कैपिटल लोन माफ करने का प्रस्ताव खारिज नहीं किया है और अभी भी इस पर चर्चा चल रही है।

एविएशन मिनिस्ट्री ने 30,000 करोड़ का कर्ज माफ करने और कंपनी में 10,000-11,000 करोड़ रुपये के निवेश की मांग वित्त मंत्रालय से की है। इससे पहले एयर इंडिया में 76 पर्सेंट सरकारी हिस्सेदारी बेचने की योजना फेल हो गई थी क्योंकि इसके लिए एक भी खरीदार सामने नहीं आया था। अभी सरकार कंपनी के विनिवेश की बात नहीं कर रही है। वो एयर इंडिया की हालत में सुधार कर 2019 लोकसभा चुनाव के बाद इसमें हिस्सेदारी बेचने की कोशिश करेगी।

अगर एयर इंडिया के लिए एविएशन मिनिस्ट्री की मांग मानी जाती है तो ये पांच साल में कंपनी के लिए दूसरा राहत पैकेज होगा।  2013 में यूपीए सरकार ने 2020-21 तक कंपनी में 30,231 करोड़ रुपये के निवेश की योजना को मंजूरी दी थी। इसमें से कंपनी को 27,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। अंतरिम मदद के तौर पर सरकार ने कंपनी को हाल में 980 करोड़ रुपये दिए थे। उसने बैंकों को कंपनी के लिए 2,000 करोड़ की गारंटी भी दी है। एयर इंडिया बैंकों से 1,500 करोड़ का कर्ज ले चुकी है और वो उनसे और 500 करोड़ का लोन ले सकती है।

केंद्र सरकार से एअर इंडिया को जो पैसा मिला, उससे कंपनी ने विदेशी और भारतीय बैंकों का ब्याज चुकाया और विदेशी वेंडर्स को भुगतान किया। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और तेल वितरण कंपनियां अब उस पर अपना बकाया क्लियर करने के लिए दबाव डाल रही हैं। तेल कंपनियों ने डेली बेसिस पर कंपनी से 20 करोड़ के फ्यूल बिल का भुगतान करने को कहा है। उन्हें कंपनी से 5,000 करोड़ रुपये वसूलने हैं। वहीं, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को कंपनी से 3,000 करोड़ रुपये लेने हैं।

                                                – एपीएन, ब्यूरो रिपोर्ट

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