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देशभर में मी टू कैंपेन आजकल खूब चर्चा में है। इस कैंपेन के जरिए महिलाएं अपने साथ वर्कप्लेस पर होने वाले व्यवहार को सामने ला रही हैं और अपने साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा कर रही हैं। मी टू  कैंपेन के जरिए महिलाओं ने बॉलीवुड से लेकर राजनीतिक से जुड़े कई नामी चेहरों से शराफत का मुखौटा हटाया है। इस घमासान के बाद केंद्र सरकार ने इन सभी मामलों को गंभीरता से लिया है। केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर(GOM) का गठन किया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में जीओएम काम करेगा। जीओएम से कार्यस्थल पर शोषण रोकने के लिए मजबूत लीगल और इंस्टिट्यूशनल फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा गया है।

इस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को शामिल किया गया है। वर्तमान नियमों को और प्रभावी बनाने के लिए क्या बदलाव किए जाएं, यह जीओएम को बताना होगा। ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के शोषण के मामले रूकें।

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गृह मंत्रालय ने कहा, ‘इस मामले को गंभीरता से लेते हुए और इससे संबंधित मामलों पर बड़े स्तर पर सुलझाने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर का गठन किया गया है।’ जीओएम को वर्तमान प्रावधानों को जांचने और उसमें जरूरी बदलाव सुझाने के लिए 3 महीने का समय दिया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार वर्कप्लेस पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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इसके अलावा महिला एवं बाल विकाय मंत्रालय ने एक इलेक्ट्रॉनिक शिकायत बॉक्स की व्यवस्था की है। इसके जरिए महिलाएं कार्यस्थल पर होने वाले यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने ही इस संबंध में जांच के लिए एक कमिटी बनाने की बात कही थी।

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