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केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की मुसीबतें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं, क्योंकि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने उन पर 6 और आरोपों की जांच शुरू कर दी है। इसमें बैंक घोटालों के आरोपी नीरव मोदी, विजय माल्या और एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी शिवशंकरन के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर के आंतरिक ईमेल को लीक करने का आरोप भी शामिल है।  नए आरोपों के बारे में सीवीसी ने सरकार को सूचित किया है, जिसके बारे में पिछले साल 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने वर्मा की जांच रिपोर्ट दाखिल करने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक टीम द्वारा शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

वर्मा के खिलाफ उनके ही पूर्व नंबर दो विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए 10 आरोपों की जांच के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्मा से पूछताछ की जानी चाहिए।  सीवीसी के एक सूत्र ने कहा कि सीबीआई को 26 दिसंबर को एक पत्र के माध्यम से कहा गया है कि वह इन मामलों से संबंधित सभी दस्तावेज और फाइलें उपलब्ध कराए, ताकि जांच को तार्किक रूप से पूरा किया जा सके। इसके बाद एजेंसी ने बुधवार को माल्या से संबंधित मामलों के सभी दस्तावेजों का उपलब्ध कराया। बता दें कि नीरव मोदी और माल्या फिलहाल फरार हैं।

बता दें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में 15 अक्टूबर को शिकायत दर्ज की थी। वहीं अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को 24 अगस्त को शिकायत दी थी। कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी को बढ़ा दिया था। शिकायत में वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की बात कही गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक पत्र के माध्यम से सीवीसी ने सीबीआई से सभी आरोपों से संबंधित दस्तावेजों को उपलब्ध कराने को कहा है। नीरव मोदी और शराब कारोबारी विजय माल्या देश से फरार चल रहे हैं। हाल ही में लंदन के एक कोर्ट ने विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का फैसला सुनाया था। आलोक वर्मा पर आरोप हैं कि उन्होंने 2015 में विजय माल्या के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर किया था जिसकी मदद से माल्या को देश छोड़कर भागने में मदद मिली।

एयरसेल के पूर्व मालिक सी शिवशंकरन के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर करने का आरोप है, जिससे इस 600 करोड़ रुपये के आईडीबीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी में प्रमुख आरोपी को भारत छोड़ने की अनुमति मिली। यह जानकारी मिली है कि संयुक्त निदेशक रैंक के अधिकारी ने शिवशंकरन से अपने दफ्तर और पांच सितारा होटेल में मुलाकात की। यह मुलाकात के सेवा नियमों और सीबीआई की आंतरिक प्रक्रियाओं के विपरीत थी।

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