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लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। वह किडनी की बीमारी के चलते कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती थे, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। बता दें कि तबीयत नाजुक होने के बाद बीते 10 अगस्त को उन्हें कोलकाता के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर है और छोटे से लेकर दिग्गज नेता हर कोई उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक संस्थान थे और पार्टी लाइन से हटकर सभी सांसदों के मन में उनके लिए अपार सम्मान था। इस दुख के समय में उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ट्वीट करके सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। योगी ने कहा कि सोमनाथ चटर्जी ने अपने योगदान से भारतीय संसद की गौरवशाली परंपराओं को समृद्ध किया। उन्होंने हमेशा समाज के गरीब, कमजोर व उपेक्षित वर्गों के हितों को प्राथमिकता दी। वहीं सांसद और लोक सभा अध्यक्ष के तौर पर चटर्जी की सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा।

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सोमनाथ चटर्जी के निधन पर दुख जाहिर किया है। केजरीवाल ने कहा कि यह खबर सुनकर बेहद दुखी हूं। उन्हें लोकसभा के सबसे महानतम स्पीकर की श्रेणी में हमेशा याद रखा जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ चटर्जी के निधन पर गहर शोक जताया, उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी भारतीय राजनीति के एक कद्दावर नेता थे। उन्होंने हमारे संसदीय लोकतंत्री को मजबूत बनाया है। वह गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए हमेशा कदम उठाते थे। मोदी ने उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने भी सोमनाथ चटर्जी के निधन पर दुख जताया और कहा कि पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के निधन पर मैं शोक व्यक्त करतां हूं भारतीय राजनीति को समृद्द किए जाने के परिप्रेक्ष्य में उनका योगदान स्मरणीय रहेगा।

गौरतलब है कि माकपा के पूर्व नेता सोमनाथ चटर्जी 10 बार लोकसभा के सांसद रहे हैं। वह कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-1 सरकार में 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे। यूपीए-1 शासनकाल में उनकी पार्टी सीपीएम की ओर से सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद उनसे स्पीकर पद छोड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। जिस कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। चटर्जी सीपीआईएम के केंद्रीय समिति के सदस्य रहे थे, और उन्हें प्रकाश करात के धुर विरोधी के रूप में जाना जाता है।

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