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कांग्रेस ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर शुक्रवार को मोदी सरकार पर तीव्र हमला बोला और आरोप लगाया कि इस करार में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है, इसलिए पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन बहुत जरूरी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अगर सरकार को यह लगता है कि राफेल सौदे के विवाद को चुपचाप दफना दिया जायेगा, तो यह उसकी भूल है। इस सौदे में वायुसेना की आवश्यकता को ध्यान में नहीं रखा गया है और इस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है।

उन्होंने राफेल सौदे को लेकर मीडिया के एक वर्ग में आयी खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सौदे को लेकर कुछ नयी परतें खुली हैं। सौदे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भी कांग्रेस ने इस मामले की पूरी जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग की थी और अब इसे फिर दोहरा रही है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि राफेल  विमान सौदे की जांच जेपीसी द्वारा कराने लायक है। कांग्रेस इस मामले पर जेपीसी गठित करने की मांग दोहराती है।”

चिदंबरम ने कहा कि 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार द्वारा किये गये 126 विमानों के सौदे को रद्द कर दिया और मात्र 36 विमान खरीदने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन सरकार ने खरीदे जाने वाले विमानों की संख्या घटाने का कोई कारण नहीं बताया। उन्होंने कहा, “सरकार ने वायुसेना की 126 विमानों की आवश्यकता को क्यों खारिज कर दिया और क्यों मात्र 36 विमान खरीदने का फैसला किया।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, वित्त मंत्री या विधि मंत्री ने कभी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब मीडिया में आ गया है। इस सौदे के जरिये विमान निर्माता ‘दसाल्ट कंपनी’ को कई तरह से लाभ पहुंचाया गया है। विमानों को भारत की जरूरत के अनुरूप बनाने के लिए 126 विमानों की तकनीकी लागत को 36 विमानों की कीमतों में शामिल किया गया। वास्तव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने अप्रैल 2015 से लेकर अगस्त 2016 की अवधि में दसाल्ट को उपहार दिया है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने राष्ट्र को दो तरीकों से भ्रमित किया है। एक ओर, उसने राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ किया है और दूसरी ओर वायुसेना की जरूरतें पूरी करने से इंकार कर दिया है। सरकार मात्र 36 विमान खरीद रही है जबकि वायुसेना को 126 विमानों की जरूरत है। ये राष्ट्र की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने विभिन्न समय में विमान की कीमतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के निर्णयों के कारण प्रत्येक राफेल विमान के लिए 186 करोड़ रुपये अधिक देने होंगे। चिदंबरम ने सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठायें और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को एक ‘चतुर चालाक’ व्यक्ति बताया।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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