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महाराष्ट्र में अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) द्वारा पिछले छह दिनों से चल रहा किसानो का आंदोलन सोमवार को सरकार द्वारा अधिकतर मांगे माने जाने के बाद समाप्त हो गया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार ने किसानों अधिकतर मांगें मान ली गई हैं और उन्‍हें लिखित पत्र दिया है।

देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार दोपहर विधानसभा में किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार ने मांगों पर लिखित भरोसा देने की बात कही है। जिसके बाद किसानों ने आंदोलन वापिस ले लिया।

बता दें कि आजाद मैदान में करीब 30 हजार किसान विधानसभा घेरने पर अड़े रहें। फडणवीस किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख की बात कह चुके थे।

सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए किसानों की सभी मांगों पर चर्चा किए जाने की बात कही। उन्होंने बताया, ‘उनकी करीब 12-13 मांगें थीं जिनमें से कुछ हमने मांग ली हैं और उन पर हम लिखित ड्राफ्ट देंगे। मुझे लगता है कि वे हमारे फैसले से संतुष्ट हैं।’

बता दें कि किसानों की महत्वपूर्ण मांगों में से एक जमीन किसानों के नाम पर करने की मांग मान ली गई है। आदिवासी विकास एवं जनकल्याण मंत्री वी सावरा ने बताया कि किसानों की शिकायत है कि जो उनकी जमीन है उससे कम उनके नाम पर है, तो जितनी भी जमीन पर वे खेती कर रहे हैं वह उनके नाम पर होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह मांग मान ली है। मुख्य सचिव इसे देखेंगे और 6 महीने के अंदर इसे लागू किया जाएगा।

मीटिंग से पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, ‘हमारी सरकार किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक है। मोर्चा के पहले दिन से ही हमलोग किसानों की कई मांगों को लेकर बातचीत की है। शुरुआत से ही जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन किसानों के साथ संपर्क में हैं। हालांकि, किसान पहले से ही मार्च निकालने को लेकर अटल थे।’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के किसानों की समस्या है।

बता दें कि 6 दिन पहले नासिक से विभिन्‍न मांगों को लेकर करीब 35,000 किसान पैदल ही रविवार को मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे। हालांकि सोमवार को किसानों का बड़ा प्रदर्शन का कार्यक्रम था, लेकिन किसानों से इसे यह कहकर टाल दिया कि वे नहीं चाहते कि उनके कारण किसी को कोई नुकसान या परेशानी हो।

ऑल इंडिया किसान सभा के इस मोर्चे में ज्यादातर आदिवासी किसान शामिल हुए। इनकी मांगों में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के अलावा किसानों को संपूर्ण कर्ज माफी, प्रमुख जिंसों के डेढ़ गुना मूल्य देना, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से त्रस्त होने की स्थिति में प्रति एकड़ 40 हजार रुपये तक मुआवजा देने जैसी मांगें शामिल थीं।

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