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चंबल के मिजाज को बदलने के इरादे से बीहड़ों में निर्मित इटावा सफारी पार्क पर पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। पिछली एक जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्क का लोकार्पण किया था हालांकि पार्क को आम जनमानस के लिए अभी खोला नहीं गया है। इसके बावजूद भी पार्क के आसपास के लोगों ने ऐसी गतिविधियां शुरू कर दी है जो पर्यावरणीय तौर पर पार्क को नुकसान पहुंचा सकती है। इसे लेकर के सफारी प्रशासन बेहद चिंतित नजर आ रहा है। इसी कारण सफारी प्रशासन ने जिला प्रशासन से पत्राचार शुरू कर दिया है ताकि इटावा सफारी पार्क को होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

पार्क के निदेशक वी.के सिंह ने बताया कि उनकी जानकारी में लाया गया है कि इटावा सफारी पार्क से सटे हुए एक बड़े भू-भाग पर निर्माण की कार्रवाई बड़ी तेजी से चल रही है जबकि शासन के निर्देशानुसार इटावा सफारी पार्क के आसपास किसी भी तरीके का कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं इटावा सफारी पार्क के नजदीकी एक क्रेशर प्लांट भी संचालित हो रहा है जिस से निकलने वाली डस्ट इटावा सफारी पार्क के पेड़ों और वन्यजीवों को खासा नुकसान पहुंचाने में जुटी हुई है ।

वी.के सिंह ने बताया कि क्रेशर प्लांट से निकलने वाली डस्ट पेड़ों की खूबसूरती को बर्बाद कर रही है इसलिए सफारी प्रशासन ने निर्णय लिया है कि प्लांट को बंद कराया जाए अन्यथा इटावा सफारी पार्क के महत्वपूर्ण समझे जाने वाले पेड़ों को खासी तादाद में बड़ा नुकसान सुनिश्चित है।  इटावा सफारी पार्क तथा यहां रहने वाले वन्य जीवों को हरा भरा माहौल उपलब्ध कराया जाना है। इसके लिए सफारी के आसपास 10 किलोमीटर क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रहेगा।

सफारी के आसपास हो रहे हैं कुछ निर्माण कार्यों को लेकर सफारी प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। इसमें बताया गया है कि इससे सफारी तथा वहां के वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है इसलिए ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे सफारी के चारों ओर 10 किलोमीटर क्षेत्र प्रदूषण मुक्त रहें। यहां कोई ऐसा प्लांट आदि ना चले जिससे पर्यावरण को खतरा हो और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा।

पार्क के निदेशक ने 15 मई को एक पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी को स्पष्ट किया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के आदेशानुसार 23 नवम्बर 2016 को इटावा सफारी पार्क को मिनी जू घोषित किया है जो कि एक संरक्षित क्षेत्र है। पार्क के आसपास व्यवसायिक निर्माण कार्यो से पार्क के वन्य जीवो के संरक्षण एवं विकास पर कुप्रभाव पड़ेगा।

गौरतलब है कि पर्यावरण नियम 2002 के प्रावधानो के अनुसार पार्क के दस किलोमीटर की परिधि मे व्यवसायिक निर्माण प्रतिबंधित है। सफारी पार्क ना केवल इटावा के लिए बल्कि उत्तर प्रदेश के लिए एक रोल मॉडल है इसकी वजह से हमारी पहचान अलग ढंग से बनी है। यह उत्तर भारत के प्रमुख सफारी पार्क को में से एक है। सफारी पार्क में सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें लायन का ब्रीडिंग सेंटर है और पांच अन्य सफारियॉ भी है।

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