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अगर कभी हमें  अस्पताल जाने की नौबत आती है, तो घर लौटते हीं हम अच्छी तरह से हाथ-पैर घोना नहीं भूलते। नहा-धोकर कपड़े बदलने  का मौका मिल जाए, तो हम कोई जोखिम उठाना नहीं चाहते। पता नहीं,अस्पताल से हम जाने-अनजाने हम कौन सी बीमारी लेकर घर आ जाएं । इसलिए अस्पताल से लौटने पर साफ –सफाई बहुत जरुरी है । लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्माचारी इस मामले में बेहद लापरवाही बरतते हैं । कम से काम हाथों  के साफ-सफाई को लेकर । अक्सर जब अस्पताल के कर्माचरियों को लगता है कि कोई उन्हें नहीं देख रहा है तो वे हाथ नहीं धोते ।

जी हां, आप मानें या न मानें, लेकिन यह सच है ।  यूएनएसडब्ल्यू के मेडिकल शोधकर्ताओं ने आस्ट्रेलिया के अस्पतालों में शोध के दौरान पाया कि अस्पताल के कर्मचारी आश्चर्यजनक रुप से हाथों की स्वच्छता पर कम ध्यान देते हैं । अक्सर अस्पताल कर्मचारी इस मामले में सरकारी दिशानिर्देशों  की भी अनदेखी करते हैं। कर्मचारियों के इस रवैये से मरीजों और उनके तीमारदारों में संक्रमण दर का खतरा बढ़ जाता है ।

आस्ट्रेलिया में सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें लागू की है, जिनकी निगरानी विशेष टीम करती है । स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कम से कम 70फीसदी शर्तों को पूरा करना जरुरी है, लेकिन शोध में पाया गया कि निगरानी टीम की नजर जब तक स्वास्थ्यकर्मियों पर रहती है तो वे 90 फीसदी की दर तक स्वच्छता शर्तों को पूरा करते हैं, लेकिन निगरानी हटते हीं यह दर गिरकर 30 फीसदी तक पहुंच जाता है।  यानि निगरानी हटी,स्वच्छता घटी ।

शोधकर्ताओं ने यह रिपोर्ट तैयार करने में अस्पताल में  सिंक और मरीजों के बेड के बगल में लगे सैनिटाइजर डिस्पेंसर के पास लगे कैमरों की मदद ली । शोध में पाया गया कि जब तक निगरानी टीम के सदस्य मौजूद रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने पूरी तत्परता दिखाई, लेकिन उनके हटते हीं उन्होंने हाथों की सफाई पर ध्यान देना बंद कर दिया ।

रिपोर्ट तैयार करनेवाले यूएनएसडब्ल्यू के मेडिसिन प्रोफेसर मैरीलोइस मैकलोस भी मानते हैं कि किसी भी संक्रमण को रोकने के सबसे जरुरी है कि उस अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी अपने हाथों की स्वच्छता  को कितनी गंभीरता से लेते हैं ।

जिसके अनुसार अगर कोई हमें देख रहा होता है तो हमारा व्यवहार स्वत : बदल जाता है। बेशक यह रिपोर्ट आस्ट्रेलिया के अस्पतालों के आधार पर तैयार की गई लेकिन रिपोर्ट के नतीजे हॉथन प्रभाव का भी एक बेहतरीन उदाहरण है, जो यह कहता है कि अगर कोई हमें देख रहा होता है तो हमारा बर्ताव बदल जाता है । तो क्या मान लिया  जाए कि  भारत के अस्पतालों में भी स्थिति इससे बेहतर नहीं होगी ? वाकई यह रिपोर्ट चौंकानेवाली है,क्योंकि हम यही मानते हैं कि अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की स्वच्छता पर ज्यादा ध्यान देते हैं ।

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