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गाजीपुर के दुल्लहपुर थाने का देवा गांव जिसे स्वामी सहजानंद सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है… स्वामी सहजानंद सरस्वती किसान आंदोलन के नायक थे और देवा गांव उनकी जन्मस्थली है… स्वामी सहजानंद सरस्वती का पैतृक गांव होने की वजह से गांजीपुर सांसद और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने देवा गांव को गोद लिया था…जब देवा गांव वालों को इस गांव के गोद लिए जाने की खबर मिली को उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा… इतने कद्दावर नेता और केन्द्र में मंत्री ने इस गांव को गोद लिया है तो गांव का विकास होना तय है…खुद मनोज सिन्हा ने भी गांव वालों को विकास का भरोसा दिया था…लेकिन क्या  सांसद और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिंहा का गोद लिया गांव देवा आदर्श गांव बन सका है… क्या गांववालों को वो सभी सुविधाएं मिली हैं जो एक आदर्श गांव में रहने वालों को मिलनी चाहिए…

इन सवालों का जवाब ढूंढ़ने के लिए हम गांजीपुर संसदीय क्षेत्र के देवा गांव पहुंचे… मुख्य सड़क से देवा आदर्श गांव की ओर मुड़ने पर एक शानदार प्रवेश द्वार ने हमारा स्वागत किया… स्वामी सहजानंद सरस्वती के नाम पर बने इसी प्रवेश द्वार से हम देवा गांव में प्रवेश किया… किसी भी जगह के विकास की पहली पहचान वहां की सड़के होती हैं…इसलिए हमने सड़क जैसी बुनियादी जरूरत का जायजा लेने का फैसला किया… गांव की मुख्य सड़क तो पक्की है लेकिन जैसे-जैसे हम गांव के अंदर घुसते गए… विकास का सच सामने आता गया…

गांव की अंदरुनी सड़कें जर्जर हाल में है… सभी सड़के खड़ंजा की बनी है… एक-दो सड़कों को छोड़ दे तो ज्यादातर खड़जा सड़कें जो खस्ताहाल है… लोगों का आरोप है कि कुछ खड़ंजा सड़कों को नया बनाया भी गया लेकिन नई सड़क में पुरानी ईटों का इस्तेमाल किया गया जिससे बनने के साथ ही ये सड़कें टूटने लगी…सड़कें टूटी हुई है लेकिन जल निकासी की व्यवस्था भी मुक्ममल नहीं है… हालांकि कुछ जगहों पर हमे नालियों का निर्माण होता दिखा…

सांसद और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के वादों पर भरोसा कर पिछले तीन साल से गांव वाले विकास की राह देख रहे हैं… गांव वालों के मुताबिक उनके सांसद मनोज सिन्हा ने गांव को आदर्श बनाने के लिए जिन सुविधाओं को देने की बात की थी उसमें से बहुत कम ही पूरे हुए…काम कम, आश्वासन ज्यादा मिला

गांव वालों की शिकायतों को सुनने के बाद हम गांव में आगे बढ़े… गांव में हमें स्वामी सहजानंद का स्मारक दिखा…स्वामी सहजानंद संगठित किसान आंदोलन के जनक थे और इसी गांव में पैदा हुए थे… गांव वाले बड़े गर्व से यहां आने वालों को स्वामी सहजानंद की कहानियां सुनाते है…लेकिन स्वामी सहजानंद के स्मारक में हमे वो रौनक नहीं दिखी जिसकी हमें उम्मीद थी… हां, इतना जरूर है कि इस गांव को गोद लेने के बाद सांसद और केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने  स्मारक के चारो ओर चारदीवारी का निर्माण जरूर करा दिया…

स्वामी सहजानंद के स्मारक के सामने ही एक तालाब है जो ठीक स्थिति में है… हालांकि दस्तावेजों की बात करे तो गांव में और भी पोखर खुदे है लेकिन वो नजर नहीं आते…  ग्रामीणों ने देवा गांव के प्रधान जब्बार अंसारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बताया कि बिना पोखर की खुदाई कराए 1 लाख 80 हजार रुपए का भुगतान करा लिया गया

गांव में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद हम आगे बढ़े तो हमें गांव में सार्वजनिक शौचालय देखने को मिला… सार्वजनिक शौचालय को सांसद मनोज सिन्हा ने बनवाया है जो काफी सुंदर बना है… शौचालय देख कर गांव के आदर्श गांव होने का अहसास हुआ…

गांव में जब हमने विद्युत व्यवस्था का जायजा लिया तो व्यवस्था ठीक-ठाक ही नजर आई…गांव में कई बिजली के खंभे लगाए गए है जबकि गांव को रोशन करने के लिए 22 सोलर लाइट्स लगाई गई हैं…सांसद मनोज सिन्हा ने देवा गांव में विकास की बुनियाद तो रखनी शुरू कर दी है लेकिन विकास की रफ्तार बेहद कम है… यही वजह है कि सड़क, पानी, अस्पताल, स्कूल, इंटरनेट, वाईफाई और खेलकूद के स्थान जैसी बुनियादी सुविधाओं से आज भी ये गांव महरूम है

आपको जानकर हैरत होगी कि आदर्श गांव के तौर पर चयन होने के बावजूद गाजीपुर संसदीय क्षेत्र का देवा गांव आज भी एक अदद स्वास्थ्य केन्द्र के लिए तरस रहा है…गांव में कोई भी स्वास्थ्य केन्द्र नहीं है ऐसे में इलाज के लिए गांव वालों को यहां से दूसरे गांव या फिर गाजीपुर जिला अस्पताल जाना पड़ता है… गर्भवती और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए तो यहां हर वक्त जान का खतरा बना रहता है…वैसे कहने को तो यहां हर काम प्रस्तावित है… सांसद के प्रतिनिधि और अधिकारी वक्त-वक्त पर गांव आकर सर्वे करते है, प्रोजेक्ट बनाते हैं… गांव वालों को विकास का आश्वासन देते है लेकिन ये आश्वास भी देवा गांव में चुनावी वायदे की तरह नजर आ रहे हैं…

हालांकि जब हमने इस मामले में गांव के प्रधान के प्रतिनिधि से बात की तो उन्होंने सांसद मनोज सिंहा के तारीफों की पुल बांध दी… प्रधान प्रतिनिधि के मुताबिक गांव में काफी विकास कार्य हुआ है

सांसद आदर्श ग्राम देवा का जायजा लेने के बाद जब हमने इस मामले में गाजीपुर के परियोजना निदेशक से बात की तो उनके मुताबिक भी देवा आदर्श गांव बन चुका है…लेकिन जब हमने गांव में अस्पताल नहीं होने की बात कही तो उनका कहना था कि गांव वाले पास के गांव जाकर इलाज करा रहे है… अजीब बात है… देवा को आदर्श गांव के तौर पर विकसित किया जा रहा है और बात सुविधाओं की हो, तो यहां के लोगों को उसे हासिल करने के लिए दूसरे गांव का रुख करना होगा

मनोज सिन्हा देश की राजनीति में बड़ी हस्ती माने जाते हैं… मनोज सिन्हा ना सिर्फ गाजीपुर से सांसद हैं बल्कि वो केन्द्र सरकार में मंत्री भी है लेकिन इतनी बड़ी हस्ती होने के बावजूद उनके गोद लिए गांव में विकास की दुर्दशा को देख कर चिंता होती है… जब पीएम मोदी के मंत्री ही सांसद आदर्श ग्राम योजना के प्रति उपेक्षा भाव रखेंगे तो बाकियों का क्या होगा…

—पीयूष रंजन, एपीएन

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