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आपने लोगों को रुपये पैसे या फिर कोई सामान उधार देते या लेते सुना होगा। लेकिन हम आपको जो खबर दिखाने और बताने जा रहे हैं उसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आखिर हम किस समाज में रह रहे हैं। जी हां, बात ही कुछ ऐसी हैरान करने वाली है। इक्कीसवीं सदी में पहुंचने का दंभ भरने वाले समाज में इस बर्बर बर्ताव को देखकर आपके पसीने छूट जाएंगे। लेकिन ये कलयुग है। इसलिए इस खबर में आपको कलयुग का असर भी देखने को मिलेगा।

उत्तराखंड के उधमसिंहनगर जिले के जशपुर क्षेत्र के रहने नसीम अहमद ने अपनी पत्नी रहमत जहां को अपने दोस्त को 20 दिन के लिए उधार दे दिया था। अहमद ने मुरादाबाद के भोजपुर के रहने वाले शफी अहमद उर्फ बाबू के हवाले अपनी पत्नी को सौंप दिया था। शफी भोजपुर नगर पंचायत के चेयरमैन रहे थे। सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई तो जनाब अपने दोस्त नसीम के यहां पहुंच गए उनकी पत्नी को उधार मांगने के लिए। ताकि उसने अपनी पत्नी बनाकर चेयरमैन का चुनाव लड़वा सकें।

अब दोस्ती पर भरोसा कर नसीम अहमद ने भी अपनी पत्नी को उधार दे दिया। नसीम ने सोचा था कि पत्नी चेयरमैन बन गई तो उनके भी मजे ही मजे हो जाएंगे।लेकिन चेयरमैन बनने के बाद पत्नी ने उनके साथ आने से ही मना कर दिया। नसीम अहमद ने पुलिस के साथ ही अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है।

दरअसल, नसीम अहमद ये समझ पाने में भूल कर गए कि ये कलियुग है।छोटे पदों पर विराजमान होने के बाद लोगों की नीयत बदल जाती है।रहमत जहां तो चेयरमैन बन बैठी थी।नसीम अहमद की पत्नी होने से ही इनकार कर दिया।

रहमत ने माना कि कभी नसीम उनके पति हुआ करते थे। उनसे 2010 में तलाक के बाद शफी से 2011 में निकाह कर लिया था। अब रहमत जहां चेयरमैन है। सियासी रूप से अहम पद पर विराजमान है। अब उनके सामने तो पूरे क्षेत्र की चिंता है। एक पति की चिंता क्या करे।  नसीम अहमद ने जशपुर के कुंडा थाने के साथ ही अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। अदालत में पुलिस से रिपोर्ट तलब की। पुलिस रहमत जहां के पक्ष को ही सही बता रही है। भोजपुर नगर पंचायत के लिए नवंबर 2017 में चुनाव हुए थे।

शफी अहमद सामान्य वर्ग से आते थे जबकि सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो गई थी। इसलिए उन्होंने रहमत जहां से तीसरी शादी की। चुनाव जीतने के बाद रहमत नसीम के यहां आई भी। गांव वालों ने उनका स्वागत किया था। उसकी तस्वीरें भी नसीम के पास है। इसके अलावा 2016 में जारी रहमत जहां के बैंक के पासबुक में उनके पति के रूप में नसीम अहमद का ही नाम दर्ज है।

इसके अलावा मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड पर भी रहमत जहां के पति के रूप में नसीम अहमद का नाम ही दर्ज है। ऐसे में ये सिर्फ एक व्यक्ति से ही नहीं। चुनाव आयोग के साथ भी धोखाखड़ी का मामला बनता है। ऐसे में इस मामले की पूरी जांच कराई जानी चाहिए।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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