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अब भारत का अपने अखंड भूभाग जम्मू कश्मीर पर दावा और पुख्ता होता जा रहा है। जब हम अखंड जम्मू कश्मीर की बात करते हैं तो स्वाभाविक रूप से उसमें गुलाम कश्मीर यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी शामिल होता है। पीओके के सामाजिक, आर्थिक और मानवाधिकारों की स्थिति पर नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस ने साल 2011 में एक शोध रिपोर्ट जारी की रिपोर्ट में किए गए खुलासे वैश्विक जगत की आंखें खोलने के लिए काफी हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने से बौखलाया हुआ है लेकिन उसके अवैध कब्जे वाले PoK में अंधाकानून चल रहा है। बेरोनेस एम्मा निकोलसन ने अपनी रिपोर्ट ‘कश्मीर प्रेजेंट सिचुएशन एंड फ्यूचर प्रोस्पेक्ट्स’ में PoK की सामाजिक और आर्थिक दशाओं की तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘गुलाम कश्मीर में स्थानीय प्रशासन निष्क्रिय है और पाकिस्तान और उसकी सेना का इस क्षेत्र पर पूरा कब्जा है। कथित आजाद कश्मीर संप्रभु क्षेत्र नहीं हैं इस्लामाबाद में कश्मीर मामलों के मंत्रालय द्वारा PoK पर शासन किया जाता है।

पाकिस्तान ने पीओके पर अवैध कब्जा कर रखा है और अपनी भेदभाव पूर्ण नीतियों से पूरे क्षेत्र को बदहाल और आतंकवाद की नर्सरी बना रखा है। 1947 के बाद से जम्मू-कश्मीर के भारत शासित भाग में लोकतांत्रिक व्यवस्था है। जबकि पीओके में पाकिस्तान ने छद्म लोकतंत्र के सहारे तानाशाही व्यवस्था बना रखी है।

PoK की प्रशासनिक रूपरेखा

पीओके पर कब्जा जमाने के बाद अक्टूबर 1947 में गुलाम कश्मीर में सरकार का गठन हुआ था। ये सरकार युद्ध समिति की तरह काम कर रही थी। राष्ट्रपति के पास विधि और कार्यकारिणी संबंधी सभी अधिकार थे। मुस्लिम कॉन्फ्रेंस की वर्किंग कमेटी का विश्वास जीतने वाले व्यक्ति को ही पीओके के राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया जाता था। सेंट्रल पाकिस्तान में एक सर्वोच्च प्रशासकीय कार्यालय खोला गया था जो कि गुलाम कश्मीर के राष्ट्रपति द्वारा लिए गए निर्णयों को अंतिम स्वीकृति प्रदान करता था।

PoK में मानवाधिकार उल्लंघन

पाकिस्तान PoK की स्थिति को दुनिया के सामने नहीं आने देने के लिए सभी तमाम हथकंडे अपनाता रहा है। पीओके की जनता पाकिस्तान के जुल्मों से आजादी चाहती है। वहां पर बड़ी संख्या में अंदरूनी आंदोलन चल रहे हैं। आंदोलनकारी वहां पर पाकिस्तानियों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों का खुलासा कर रहे हैं। एमा निकोलसंस की रिपोर्ट के अनुसार वहां पर स्थानीय प्रशासन दिशाहीन है और पाकिस्तानी सेना और सरकार का ही नियंत्रण है लोगों को रहन-सहन, शिक्षा और अन्य चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

PoK में बढ़ती जिहादी गतिविधियां

1990 के बाद से पीओके बढ़ती आतंकी गतिविधियों का गढ़ बन गया है। लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठन वहां के लोगों को जिहाद के लिए उकसा कर अपने संगठन में शामिल कर रहे हैं। ये सिलसिला साल 2005 में पीओके में भूकंप से मची तबाही के बाद अधिक हो गया है। पाकिस्तान ने पीओके के आर्थिक और राजनीतिक हालात को इतना खराब कर दिया है कि जो जून की रोटी के लिए वहां के नौजवान आतंकवादी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। पाक समर्थित दर्जनों आतंकी संगठन हैं जो इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाए हुए हैं।

PoK में बढ़ता चीनी प्रभाव

सच कहा जाए तो कंगाल पाकिस्तान ने एक तरह से पीओके को चीन के हाथो गिरवी रख दिया है। पाकिस्तान और चीन के बीच काराकोरम हाईवे का 1978 में निर्माण हुआ था। 1280 किमी लंबा ये हाईवे पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां प्रांत को जेजियांग क्षेत्र के कश्गर से जोड़ता है। करीब 800 किमी का हाईवे क्षेत्र पाकिस्तान में है जो पीओके के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरता है।

इस हाईवे का रखरखाव चीन ही करता है इसके जरिये चीन से पाकिस्तान में परमाणु हथियार भी पहुंचाए जाते हैं। चीन पीओके में कई तरह की परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। चीनी कंपनियां वहां पर मौजूद नदियों पर ऊर्जा परियोजनाएं बना रही हैं। इसके अलावा भी गुलाम कश्मीर में पानी से जुड़ी कई योजनाओं पर चीन काम कर रहा है। चीनी कंपनियां यहां के लोगों के साथ एमानवीय व्यवहार करती है लेकिन इसका विरोध करने पर पाकिस्तानी सेना यहां के लोगों को अपने बूटों के नीचे रौंद देती है।

PoK में अपार प्राकृतिक संपदा

गुलाम कश्मीर में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं। वहां पर महंगे रत्न के बड़े भंडार हैं वहां विश्व का सबसे अच्छा रूबी और मार्बल पाया जाता है। बड़ी मात्रा में पानी मौजूद है पनबिजली भी बड़ी मात्रा में बन सकती है। प्रचुर संसाधन ही चीन की दिलचस्पी की वजह हैं। पाकिस्तान वर्षों से यहां के संसाधनों का दोहन करता आया है लेकिन PoK की जनता जो जून की रोटी के लिए भी तरसती है।

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