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New Delhi: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बीते काफी दिनों से परेशान चल रहे हैं उनकी बेचैनी का कारण है भारत का अनुच्छेद 370 को खत्म करना और उस पर पाकिस्तान का चीन को छोड़कर किसी देश का समर्थन ना मिलना। फिर भारत के रक्षामंत्री का परमाणु नीति पर दो टुक बयान। इमरान खान ने बृहस्पतिवार को एक बड़ा बयान दिया कि उन्होंने कहा कि उनकी भारत के साथ बातचीत करने में अब कोई दिलचस्पी नहीं है।

न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए अपने एक इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा कि उनसे बात करने का कोई मतलब नहीें है। मेरा कहने का मतलब है कि मैं सभी बातें कर चुका हूं। दुर्भाग्य से अब जब मैं पीछे मुडकर देखता हूं, तो जो सभी पहल मैंने शांति और बातचीत के लिए ​की, मुझे लगता है कि वो उसे तुष्टीकरण के लिये ले गए। अब इससे ज्यादा और कुछ नहीं जो हम कर सकते हों।

ये तब हुआ जब दुनिया भर के नेताओं ने पाकिस्तान को भारत के साथ इस तनाव का अंत करने के लिए द्विपक्षीय रूप से शामिल होने के लिए कहा। ये तनाव भारत के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद कुछ ज्यादा ही बढ़ गया। भारत ने बार—बार इस बात को स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत सिर्फ तभी की जा सकती है जब इस्लामाबाद आतंकवाद का समर्थन करना बंद कर दे।

इमरान खान पिछले महीने वाशिंगटन में अपनी इतनी प्रचारित यात्रा के बावजूद अमेरिका का समर्थन हासिल करने में असफल रहे, इस यात्रा में ही उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ दोस्ती भी की थी।

पिछले हफ्ते ट्रंप और इमरान की फोन पर बातचीत हुई जिसमें ट्रम्प ने साफ कर दिया कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत के जरिये हल होना चाहिये। हाल ही में, फ्रांस और स्वीडन ने भी पाकिस्तान को भारत के साथ बातचीत करने की सलाह दी थी।

भारत के इस कदम से बौखलाए पाकिस्तान ने अपने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में मदद के लिए चीन भी भेजा था, उन्होंने इस मुद्दे पर एक इमरजेंसी मीटिंग के लिये आग्रह किया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में पांच स्थायी सदस्यों में से चार ने भारत के फैसले पर पाकिस्तान का समर्थन नहीं किया।

पैसे की तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान ने ये भी आरोप लगाया है कि अनुच्छेद 370 के तहत प्रावधानों को खत्म करने के भारत के फैसले से न केवल क्षेत्रीय शांति को खतरा होगा, बल्कि विश्व शांति को भी नुकसान होगा। इतना ही नहीं इससे उसके पड़ोसी देशों के साथ अपने राजनयिक भी खराब होंगे जिससे द्विपक्षीय व्यापार भी नहीं होंगे।

पिछले हफ्ते यूएनएससी की बैठक के अंत में, चीन और पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गए क्योंकि सदस्यों ने उनका समर्थन करने से इनकार कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में पांच स्थायी सदस्यों में से चार ने भारत के फैसले पर पाकिस्तान की बात का समर्थन नहीं किया।

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