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देश की दो तिहाई आबादी को खाद्य सुरक्षा देने के बाद केंद्र सरकार अब तीन साल के अंदर कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार 15 राज्यों में फोर्टिफाइड चावल की शुरुआत कर रही है, जो कुपोषण से लड़ने में मददगार होगा। फोर्टिफाइड चावल की शुरुआत एक मार्च से होने की उम्मीद है।

केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती तौर पर 15 राज्यों के अति पिछड़े जिलों में फोर्टिफाइड चावल की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकारों से चर्चा अंतिम दौर में हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जल्द इन राज्यों के चिन्हित जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराए जाएंगे।

एक अनुमान के मुताबिक, देश में छह माह से पांच साल के करीब 58 फीसदी बच्चे, हर आयु की लगभग 53 फीसदी महिलाएं और 22 प्रतिशत पुरुष एनीमिया के शिकार हैं। इसलिए, लोगों के प्रतिदिन के खाने में अतिरिक्त माइक्रोन्यूटिएंट्स देना जरुरी है। इस अंतर को पूरा कर देश से  कुपोषण को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा। फोर्टिफाइड चावल में अतिरिक्त विटामिन और आयरन जैसे कई जरुरी माइक्रोन्यूटिएंट्स मिलाए जाते हैं।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत लगभग 50 फीसदी शहरी और 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को रियायती दर पर गेंहू, चावल और मोटा अनाज मुहैया कराया जाता है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के मुताबिक देश में 65 फीसदी लोग चावल खाते हैं।

जिन राज्यों में पीडीएस के तहत फोर्टिफाइड चावल की शुरुआत होगी उनमें यूपी, बिहार और झारखंड भी शामिल हैं। राज्य नीति आयोग की पिछले जिलों की सूची में ले किसी एक जिले को चिन्हित कर योजना की शुरुआत कर सकते हैं।

फोर्टिफाइड चावल के लिए उपभोक्ता को कोई अतिरिक्त कीमत नहीं चुकानी होगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले चावल के फोर्टिफिकेशन का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी।

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