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रसगुल्ले की लड़ाई आखिरकार बंगाल ने जीत ही ली। रसगुल्ला नाम पर एकाधिकार को लेकर ओडिशा के साथ लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन यानी जीआई पंजीकरण मिल गया है। इसके बाद रसगुल्ला नाम पर पूरी दुनिया में बंगाल एकाधिकार हो गया है।

बता दें कि किसी भी उत्पाद का जीआइ टैग उसके स्थान विशेष की पहचान बताता है और रसगुल्ला को लेकर बंगाल और ओडिशा के बीच यही लड़ाई चल रही थी। दरअसल बंगाल और ओडिशा के बीच यह लड़ाई पिछले तीन सालों से चल रही थी। दोनों ही अपने आप को इसके अविष्कारक बता रहे थे। ओडिशा सरकार ने जीआइ टैग हासिल करने का प्रयास किया। पश्चिम बंगाल सरकार का कहना था कि रसगुल्ले का ईजाद उनके राज्य में हुआ है जबकि ओडिशा ने इसे अपना बताया था।

इसके पीछे बंगाल का तर्क था कि बंगाल के विख्यात मिठाई निर्माता नवीन चंद्र दास ने वर्ष 1868 से पूर्व रसगुल्ले का आविष्कार किया था। वहीं ओडिशा का कहना है कि यह 600 वर्ष पहले से उनके यहां मौजूद है। उन्होंने इसका आधार बताते हुए भगवान जगन्नाथ के भोग खीर मोहन से भी जोड़ा था। इसके बाद ओडिशा के इस दावे के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

एक लंबे कानूनी प्रक्रिया के बाद मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को रसगुल्ले के लिए भौगोलिक पहचान जीआई टैग मिल गया। वहीं इस फैसले से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बहुत खुश है। उन्होंने इसे लेकर अपने ट्वीट में कहा है कि ये पूरे राज्य के लिए खुशी और गौरव की बात है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘सभी के लिए अच्छी खबर है। पश्चिम बंगाल को रसगुल्ले के लिए जीआई टैग मिलने पर हम बेहद खुश और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।’

जीआई टैग मिलने से पश्चिम बंगाल के रसगुल्ला बनाने वालों को काफी फायदा होने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे वैश्चिक स्तर पर राज्य के प्रतिनिधि के रूप में पेश करना चाहती हैं। इसके लिए वह काफी प्रयास भी कर रही हैं।

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