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ज़मीन की उपजाऊ शक्ति में लगातार आ रही कमी और मौसम की बेरुखी की वजह से किसानों का परेशान होना लाज़मी है, लेकिन इन सब के बीच उत्तराखंड में हल्द्वानी के गौलापार इलाके में किसान सहफसली खेती में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सहफसली खेती करने के बाद अब किसानों के खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल देखी जा सकती है।

हलद्वानी का गौलापार इलाका फसल उत्पादन के लिहाज से बहुत बेहतरीन माना जाता है। अब यहां किसान सहफसली खेती में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।  यानि दो फसल एक साथ, जिसे इंटर क्रॉपिंग भी कहा जाता है। किसानों के मुताबिक जो छोटी जोत के किसान है, यानि जिनके पास खेती के लिये जगह कम है, वह सहफसली खेती कर एक साथ अच्छा मुनाफा कमा सकता है। जिसको देखते हुए किसानों ने अभी लहसन के साथ गेंहू की फसल बोई है, जिससे दोनों का उत्पादन बेहतर देखने को मिल रहा है।

कृषि विभाग के आलाधिकारियों ने सहफसली खेती का दौरा कर किसानों की राय भी ली। यही नही दूर दराज से आये ग्रामीणों को सहफसली खेती के बारे में बारीक जानकारिया भी दी। अधिकारियों के मुताबिक एक बार इंटरक्रॉपिंग और ओपन क्रॉपिंग के परिणाम सामने आ जाये तो किसान अपनी जोत के मुताबिक फसल का चयन कर सकते हैं।

वही पर्वतीय दूर दराज क्षेत्रो से आये किसानों ने गेंहू और लहसन की सहफसली खेती की बारीकियां देखते हुए इस खेती की जमकर सराहना की। बहरहाल सहफसली खेती से किसानों को इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। अगर दोनों फसलो से किसान बेहतर उत्पादन करने में सफल हो जाते हैं तो किसानों की आय दोगुनी होने में ज्यादा वक्त नही लगेगा।

-ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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