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केन्द्र सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद कालेधनभ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है। भ्रष्टाचार पर निगाह रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में सबसे ज्यादा रिश्वतखोर रहते हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक एशिया पेसेफिक के 16 देशों में रिश्वत दर भारत में उच्चतम है। सर्वे में शामिल 69 फीसदी भारतीयों ने माना कि उन्हें घूस देनी पड़ती है, जबकि वियतनाम के 65 फीसदी, पाकिस्तान के 40 फीसदी और चीन के 26 फीसदी लोगों ने रिश्वत देने की बात कबूली। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए देश में हर 10 लोगों में से सात व्यक्तियों को भ्रष्टाचार का रास्ता चुनना पड़ता है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामले में पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, जापान, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड के बाद भारत सातवें स्थान पर रहा। सर्वे के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा 40 फीसदी लोगों ने माना है कि उन्हें अपना काम कराने के लिए रिश्वत देना पड़ी।

इस सर्वे में एशिया प्रशांत क्षेत्र की करोड़ो की आबादी वाले 16 देशों के 20 हजार से ज्यादा लोगों ने माना है कि उन्हें साल 2016 में कम से कम एक बार तो रिश्वत देनी ही पड़ी है। सर्वे में सबसे अधिक भ्रष्ट पुलिसकर्मी पाए गए हैं। सर्वेक्षण में 85 प्रतिशत लोगों ने माना कि पुलिस सबसे ज्यादा भ्रष्ट है।

सर्वे में केवल 14 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि कोई भी धार्मिक नेता भ्रष्ट नहीं है, जबकि 15 प्रतिशत उनके भ्रष्ट तरीकों से वाकिफ नहीं थे। पुलिस के बाद पांच सर्वाधिक भ्रष्ट श्रेणी में सरकारी अधिकारी (84 फीसदी), कारोबारी अधिकारी (79 फीसदी) , स्थानीय पार्षद (78 फीसदी) और सांसद (76 फीसदी) रहे जबकि कर अधिकारी छठे स्थान (74 फीसदी) पर हैं।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अध्यक्ष जोस उगाज ने कहा “सरकारों को अपनी भ्रष्टाचार निरोधक प्रतिबद्धताओं को हकीकत का रूप देने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए। यह समय कहने का नहीं, बल्कि करने का है। लाखों की संख्या में लोग लोक सेवकों को रिश्वत देने के लिए बाध्य होते हैं और इस बुराई का सर्वाधिक असर गरीब लोगों पर पडता है।”

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