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भारत और चीन सीमा विवाद दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। पर फिर भी इस लगातार बढ़ते गतिरोध के बीच भारत ने कल चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लिया। दरअसल भारत ने इस बैठक में आतंकवाद निरोध और सदस्य देशों के बीच सीमा नियंत्रण तंत्र को प्रोत्साहन देने के लिये हिस्सा लिया।

बता दें कि सिक्किम सेक्टर में चीनी सैनिकों के साथ गतिरोध के बीच भारत और पाकिस्तान के एससीओ का पूर्ण सदस्य बनने के बाद यह पहली पूर्ण बैठक है। यह बैठक में चीन के लायोनिंग प्रांत के डलियान में हुई। खबरों की माने तो इस सम्मेलन में आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने में सहयोग पर चर्चा की गई। इसके अलावा सीमा पार अपराध को रोकने और सीमा सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

यहां चीन स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर जारी गतिरोध का भारत-चीन संबंधों पर प्रभाव नहीं पड़ा है। चीन के सीमा नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चेन डिंगवु ने कहा कि सभी सदस्य देशों के बीच सीमा सहयोग महत्वपूर्ण है। बता दें कि चीन और भारत के अलावा रूस, कजाखिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान एससीओ के सदस्य हैं।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की माने तो चीन ने कहा है कि भारत ने मीटिंग में सिक्किम सीमा पर पैदा हुए विवाद को उठाया लेकिन इसका दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि सिक्किम के डोकालम में भारतीय सेना ने चीन के सड़क निर्माण का विरोध करते हुए काम को रोक दिया था। इसके बाद दोनों तरफ की सेनाओं में धक्का मुक्की शुरू हो गई थी और वहां तनाव का माहौल बन गया था।

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