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पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद आज सुबह सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई जिसमें फैसला लिया गया कि पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा वापस लिया जाएगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भी रणनीति कूटनीति अपनाई जाएगी।

क्या होता है ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्ज

‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ मतलब जिसकों ज्यादा तरजीही दी जाए। विश्‍व व्‍यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश का दर्जा दिया जाता है। ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा मिल जाने पर दर्जा प्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा मिलने से लाभ

‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा कारोबार में दिया जाता है। इसके तहत आयात-निर्यात में आपस में विशेष छूट मिलती है। यह दर्जाप्राप्त देश कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खुले व्यापार और बाज़ार से बंधे हैं मगर एमएफएन के क़ायदों के तहत देशों को विशेष छूट दी जाती है। सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक केमिकल, रुई, सब्जियों और कुछ चुनिंद फलों के अलावा मिनरल ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, स्टील जैसी कमोडिटीज़ और वस्तुओं का कारोबार दोनों देशों के बीच होता है।

बता दें पाकिस्तान इस समय बड़ी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और भारत के साथ उसका अच्छा खासा व्यापार होता रहा है। सीमा पर कितना भी तनाव रहा हो लेकिन व्यापार पर कुछ असर नहीं पड़ता रहा है। इस फैसले से पाकिस्तान को आर्थिक चोट पहुंचनी तय है। लेकिन एक पक्ष यह भी कहता है कि भारत अगर मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा खत्म करता है तो हो सकता है कि पाकिस्तान अपनी तरफ से भारत के साथ व्यापार ही रोक दे।

ऐसे में घाटा भारत को हो सकता है लेकिन पुलवामा के हमले बाद ऐसा लग रहा है कि भारत आर्थिक नुकसान सहकर पाकिस्तान को बख्शने के मूड में नहीं है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पूरा देश गुस्से से खौल रहा है और आतंकवादियों ने बड़ी गलती कर दी है, इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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