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पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक टकराव में लगे दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच बुधवार को एक बार फिर भारतीय और चीनी सीमा सैनिकों के बीच तनाव बढ़ गया।

सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की होती रही। ये भिड़ंत 134 किलोमीटर लंबी पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर हुई। बता दें कि यहां एक तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है।

सूत्रों के मुताबिक ये घटना उस वक्त हुई जब बॉर्डर पर भारतीय सेना पेट्रोलिंग कर रही थी। पेट्रोलिंग कर रहे भारतीय सैनिकों का सामना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों से हुआ। चीनी सैनिकों ने इलाके में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई। बुधवार देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच ये संघर्ष जारी रहा। इसके बाद, दोनों पक्ष अपने ठिकानों पर लौट आए।

सेना के एक सूत्र ने बताया कि हालांकि बाद में दोनों पक्षों में बातचीत के बाद मामले को सुलझा लिया गया। भारत ने एक शिकायत दर्ज कराई है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग की मांग की है।

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यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना हुई है। पिछले साल अप्रैल में मोदी-शी वुहान शिखर सम्मेलन से पहले, चीनी सैनिकों ने 28 बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का उल्लंघन किया था। 15 अगस्त 2017 को भी पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। दोनों पक्षों ने पत्थरों और लोहे के रॉड्स का भी एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल किया था।

बता दें कि कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है। ऐसे में चीन ने पाकिस्तान का कुछ मुद्दों पर समर्थन किया था।

मोदी सरकार द्वारा राज्य को केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने के एक दिन बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने इसका कड़ा विरोध करते हुए एक बयान दिया था। तब से, चीन इस कदम की आलोचना में पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है और इस बात पर प्रकाश डाला है कि “संबंधित पक्षों को संयम बरतना चाहिए और सावधानी के साथ काम करना चाहिए, विशेषकर उन कार्यों से बचने के लिए जो एकतरफा स्थिति को बदलते हैं और तनाव को बढ़ाते हैं”।

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