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यूनेस्को व‌र्ल्ड हेरिटेज कमेटी के 41वें सेशन में अहमदाबाद को भारत के पहले वैश्र्विक धरोहर वाले शहर के रूप में मान्यता दी है। यूनेस्को ने इसे देश को पहला ऐतिहासिक धरोहर वाला शहर घोषित किया है।

बता दें कि अहमदाबाद को हेरिटेज सिटी बनाने के लिए 2010 में उस वक्त आवेदन दिया गया था, जब नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे, लेकिन लंबी चौड़ी-प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अहमदाबाद को औपचारिक तौर पर हेरिटेज सिटी के रूप में मान्यता दी गई है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन मुख्यालय में आयोजित हुए कार्यक्रम में यूनेस्को की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी को अहमदाबाद को हेरिटेज सिटी बनाने का सर्टिफिकेट सौंपा।

गौरतलब है कि विश्व विरासत शहर की दौड़ में राजधानी दिल्ली और मुंबई सहित देश के कई अन्य शहर शामिल थे। यूनेस्को ने अहमदाबाद के अलावा कंबोडिया में समबोर पेरी कुक के मंदिर क्षेत्र और चीन के कलांगसो को भी विश्व विरासत सूची में शामिल किया है।

वहीं इस मौके पर मुख्यमंत्री रुपानी का कहना है कि अहमदाबाद सिर्फ गुजरात का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का पहला हेरिटेज शहर है। विजय रुपानी ने कहा, ‘स्मार्ट सिटी के रूप में अहमदाबाद में वे सभी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी, जो किसी भी बड़े शहर में उपलब्ध होती हैं।’ उन्होंने कहा कि जल्द ही अहमदाबाद में प्राचीन और आधुनिक दोनों ही संस्कृतियों का संगम होता नजर आएगा। गुजरात के सीएम ने कहा कि ऐतिहासिक 600 साल पुराने इस शहर में एक ओर इसकी प्राचीन संस्कृति और धरोहर नजर आएगी और दूसरी ओर यह एक स्मार्ट सिटी के रूप में भी दिखेगा।

हालांकि अहमदाबाद को विश्व विरासत शहरों में शामिल करने का कारण इसकी ऐतिहासिकता है। अहमदाबाद के किलेबंद शहर को सुल्तान अहमद शाह ने 15 वीं सदी में साबरमती नदी के किनारे बसाया था। यह शहर वास्तुकला का शानदार नमूना पेश करता है जिसमें छोटे किले, किलेबंद शहर की दीवारों और दरवाजों के साथ कई मस्जिदें और मकबरे महत्वपूर्ण हैं।

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