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यूपी में जब चुनाव अपने उबाल पर है, उस समय पार्टियों को नई नई चीजें याद आ रही है, अब राम-रहीम के नाम पर सियासत हो रही है, धर्म के नाम पर देश को बांटा जा रहा है। टिकटों और वोटों को मजहब के नाम पर अलग किया जा रहा है। एक तरफ जहां सपा, बसपा में मुस्लिम उम्मीदवारों की तादाद ज्यादा है तो दूसरी ओर बीजेपी की तरफ से कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने कहा था कि कोई भी मुस्लिम जीतने लायक नहीं है, इसीलिए टिकट नहीं दिया, लेकिन अब बीजेपी इस बात का अफसोस मना रही है कि मुस्लिमों को टिकट देना चाहिए था। हाल ही में बीजेपी के मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मुस्लिमों को टिकट दिया होता तो ज्यादा अच्छा होता। यानि सपा-बसपा तो मुस्लिमों के नाम दांव लगा रही है मगर वहीं बीजेपी मुस्लिम उम्मीदवार न होने का गम मना रही है।

 चुनाव में विकास के मुद्दे पर तो कहीं बातचीत नहीं होती, अर्थव्यवस्था की बात करें तो 2015-16 में 19.2 विकास दर गिरी है, मेक इन इंडिया पिट चुका है। भारत में बने उत्पादों की मांग में भारी कमी आई  है। आखिर अब देश को ऊपर कैसे उठाया जाएगा? क्यों अब राम-रहीम पर जंग की जा रही है?

इन्हीं तमाम सवालों का जवाब तलाशने के लिए एपीएन के खास शो मुद्दा में मेहमानों को बुलाया गया जिनमें जगदेव सिंह यादव (मंत्री, यूपी सरकार), शहजाद पूनावाला (नेता, कांग्रेस), गोविंद पंत राजू (सलाहकार सम्पादक, एपीएन), डॉ चंद्रमोहन (प्रवक्ता, बीजेपी),  मुफ्ती एजाज अरशद कासमी (सदस्य, AICLB), डॉ एस के दत्ता (अर्थशास्त्री) शामिल थे। शो का संचालन एंकर अनंत त्यागी ने किया।

जगदेव सिंह ने कहा कि सपा सरकार किसानों की बात करती है, मजदूरों की बात करती है जो कि सभी धर्मों के होते हैं, लैपटॉप बांटे, लेकिन बिना भेदभाव के। भेदभाव तो बीजेपी करती है, तभी तो एक भी मुस्लिम समुदाय के लोग को टिकट नहीं दिया। बीजेपी वोट की राजनीति करती है। हार को देखकर श्मशान-कब्रिस्तान, 3 तलाक, जैसे मुद्दों पर बात करती है। अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर जगदेव जी ने कहा कि सीएम साहब ने बहुत प्रयास किए हैं, बाहर से उद्योगपतियों को भी बुलवाया, मीटिंग भी की, इंडस्ट्रिज भी लगवाई लेकिन केंद्र सरकार ने कभी सहयोग नहीं किया। नोटबंदी ने सब बर्बाद किया।

शहजाद पूनावाला ने कहा कि बीजेपी सबका साथ सबका विकास की बात करती है लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में  मुस्लिमों को टिकट नहीं दिया था, उस गलती को अब सुधारा जा सकता था मगर अब भी टिकट नहीं दिया। साक्षी महाराज ने कब्रिस्तानों को लेकर जो बयान दिया है उस पर बीजेपी क्यों नहीं हटाती साक्षी महाराज को। चुनाव के समय में राम मंदिर कहते हैं। सत्ता आने पर कुछ नहीं करते। कांग्रेस राम के नाम पर लोगों को नहीं ठगती। बीजेपी मुस्लिम विरोधी भड़काऊ बयान देती है। रही बात अर्थव्यवस्था की मनमोहन जी के समय में ग्रोथ ज्यादा थी जो कि अब नहीं है।

डॉ चंद्रमोहन ने कहा कि जो बीजेपी के नाम पर काम करेंगे टिकट उसी को ही तो दिया जाएगा। मेक इन इंडिया से पहले मेक इन स्टेट होना चाहिए। प्रदेश सरकार केंद्र सरकार का साथ नहीं देती। यूपी की सरकार अगर दहशत की फसल बोएगी तो उद्दयोग तो मर ही जाएंगे ना।

मुफ्ती काजमी ने कहा कि बीजेपी के लोग इरिटेशन के शिकार हैं। इसीलिए अलगाववाद के बयान देते हैं गठबंधन और बीजेपी दोनों का मकसद एक है, नीतियां एक हैं। हिंदु-मुसलमान के दरमियां तनाव पैदा करके वोट हासिल करना चाहते हैं। पिछले 5 साल में इतने दंगे हुए, अखिलेश चाहते तो दंगे रुक सकते थे मगर उन्होंने जानबूझकर दंगे करवाए, सिर्फ अपने फायदे के लिए। मुस्लिम इस बार क्लियर हैं वो बसपा की तरफ हैं।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि धर्म-निरपेक्षता की बात जब भी ये राजनेता करते हैं तो स्वार्थ की बू आती है। इतनी सहिष्णुता तो राजनेताओं में होनी चाहिए कि अगर विपक्ष ने कोई बात बोली है तो उसका जवाब गंभीरता से दें। अर्थव्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि पिछले सात सालों में जो गिरावट आई है, उस समय कांग्रेस और बीजेपी दोनों का शासन रहा है। किसी एक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। चुनावों के समय पूछा जाता है कितनी बिजली दी या नहीं। जब सत्ता होती है, तब सवाल क्यों नहीं उठाए जाते?

डॉ एस के दत्ता ने कहा कि पिछले दो सालों में मंदी आई है और नोटबंदी पर अभी आकलन नहीं किया जा सकता क्योंकि एनआरआई खातों से अभी भी RBI  में पैसे जमा हो रहे है तो इसका आकलन जून में विस्तार से हो पाएगा। लेकिन नोटबंदी से घरेलू उद्दयोग जरुर प्रभावित हुए हैं। विकास के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों की भागीदारी की जरुरत है। सत्ता में आई दोनों ही पार्टियां विकास पर खरी नहीं उतर पाई है, आंकड़ों के माध्यम से उदाहरण देते हुए उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट किया। आर्थिक ढांचे को सही किया जाना चाहिए। इकोनॉमिक हॉलिस्टिक विजन की जरुरत है।

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