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इसरो भारत जहां जमीन पर अपनी आर्थिक और राजनीतिक गतिविधियों के चलते पूरी दुनिया में परचम लहरा रहा है वहीं जमीन से ऊपर अंतरिक्ष में भी वह डंके पे डंका बजाए जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) वर्तमान समय में दुनियाभर की सैटेलाइट लांच कर खूब पैसे कमा रहा है और उसका राजस्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इस कार्य में उसका सबसे बड़ा मददगार बन कर उभरा है उसका पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) जो कि उसी के द्वारा निर्मित है। पीएसएलएवी के नाम 28 देशों के 209 सैटलाइट्स को एकसाथ अंतरिक्ष में पहुंचाने का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है। सबसे खास बात यह है कि इसरो इन सैटेलाइटों को इतने कम दाम में अंतरिक्ष में भेज रहा है कि दूसरे अन्य देश भी उसके तरफ खींचे चले आ रहे हैं और उसका मार्केट वैल्यू बढ़ता जा रहा है।

ISRO's new doors to earn foreign currencyबता दें कि एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन भारत की अंतरिक्ष व्यापार कंपनी है। 2015-16 में एंट्रिक्स ने विदेशी सैटलाइट्स की लॉन्चिंग से 230 करोड़ रुपये कमाए थे। वहीं 2013 से 2015  तक इसरो ने 28 विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज चुका है जिससे करीब 600 करोड़ रुपये की कमाई हुई। पीएसएलवी की बात करें तो 23 जून को पीएसएलवी सी38 712 कि.ग्रा. का कार्टोसेट-2 सैटलाइट के साथ-साथ 30 अन्य सैटलाइट्स को अंतरिक्ष ले गया। इनमें 29 सैटलाइट्स दूसरे देशों के थे।

आकंड़ो के मुताबिक वैश्विक स्तर पर स्पेस इंडस्ट्री अभी 200 अरब डॉलर (करीब 12871 अरब रुपये) की आंकी जा रही है। इस आकड़े को देखते हुए इसरो को सैटेलाइट मार्केट में अपना दम दिखाने के लिए अभी बहुत काम करना है किंतु इसरो जिस तेजी से आगे बढ़ रहा वो भारत के लिए एक सकारात्मक पहलू हो सकता है।

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