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झारखंड का झरिया शहर जल रहा है। ये किसी कवि की कल्पना या अखबार की हेडलाइन नहीं एक ‘ज्वलंत’ सच्चाई है। सरकार कहती है कि पूरे शहर के नीचे जलती हुई आग है, वो भी पिछले 100 सालों से। लोग कोयले की भट्ठी बनी ज़मीन पर बिना किसी भविष्य की उम्मीद में रह रहे हैं। उनकी उम्मीदों को नासा की एक रिपोर्ट से और झटका लगा है। नासा के उपग्रह टेरा से ली गई हालिया तस्वीरों से चौंकाने वाला यह रहस्योद्घाटन हुआ है। चार साल में आग का दायरे में 1 वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है। इस तेजी ने सबको चिंता में डाल दिया है।

झारखंड की कोयला खदानों में पिछले सौ साल से धधक रही आग का दायरा बढ़ता जा रहा है। विश्वभर में यह आग चिंता का विषय बनी हुई है। आशा जताई जा रही थी कि यह सिमटने लगी है, लेकिन नासा की हालिया तस्वीरों ने चिंता बढ़ा दी है। कोयलांचल के रूप में ख्यात झारखंड के धनबाद क्षेत्र में जिस जमीन के नीचे कोयला धधक रहा है, उसके ऊपर करीब पांच लाख की आबादी दहशत के साये में जी रही है। बताया जा रहा था कि पिछले कुछ दशकों के दौरान कई उपायों से आग का दायरा सिमटता गया है। आशा जताई जा रही थी कि यह और सिमटेगी। अधिकारी इसे लेकर बड़े-बड़े दावे भी कर रहे हैं। लेकिन नासा की एक रिपोर्ट और अफसरों के बयान में विरोधाभास है।

मगर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के उपग्रह टेरा से ली गई हालिया तस्वीरों से चौंकाने वाला यह रहस्योद्घाटन हुआ है कि आग घटने की बजाय बढ़ती जा रही है। चार साल में आग का दायरे में में 1 वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है। इस तेजी ने सबको चिंता में डाल दिया है।

90 के दशक में आम जनता के बीच इस मुद्दे पर चर्चा का दौर चलना शुरू हो गया लेकिन ये राजनीतिक मुद्दा नही बन सका। 2000 में अलग राज्य झारखंड बनने के बाद आम लोगों में कुछ आस जगी थी। कई छोटे-छोटे संगठन इसके लिए संघर्ष करने लगे थे। चुनावों मे भी यह मुद्दा बना।

केंद्र और राज्य सरकारें पुनर्वास योजना चलाने का दावा करती हैं। 2004 में झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार का गठन किया गया। यह जरेडा के नाम से जाना जाता है। जरेडा ने पुनर्वास के लिए 7,112 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान तैयार किया है। इसे दो फेज में 2021 तक पूरा किया जाना है। हालांकि इसकी सफलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यहां के लोग नेताओं, अफसरानों के मुंह से आग बुझाए जाने के वादे सुन-सुन कर पक चुके हैं। सारी संभावनाओं या यूं कहें उम्मीदों को उस समय विराम लग गया जब सरकार ने कुछ समय पहले यह घोषणा कर दी थी कि ह आग नहीं बुझ सकती। हालांकि इसे नियंत्रित किया जा सकता है और इस दिशा में पहल भी की जा रही है। इसके लिए झरिया के लोगों को अग्नि प्रभावित स्थानों से हटा कर सुरक्षित स्थान पर बसाना होगा। नए सर्वे के मुताबिक एक लाख लोगों को विस्थापित किया जायेगा। इसके लिए जेआरडीए व जिला प्रशासन से बात भी हुई है। क्या सच में ऐसा है? लगता तो नहीं है।

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