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मोदी सरकार विकास के जितने दावे करे लेकिन बीजेपी के शासन वाले राज्यों में विकास की रफ्तार बहुत अच्छी नहीं हैं। खासकर बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में स्थिति बेहद खराब है। थिंक टैंक पब्लिक अफेयर सेंटर( पीएसी) की वार्षिक रिपोर्ट में ये नतीजे सामने आए हैं। राज्यों के कामकाज के अध्ययन और सर्वे में यह बात सामने आई है कि बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश देश में सबसे दयनीय शासन वाले राज्य हैं।

यह रिपोर्ट तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए परेशानी का कराण बन सकते हैं। सुशासन बाबू के रुप में मशहूर नीतीश कुमार 2019 के आम चुनावों में अपनी अहम भूमिका देख रहे हैं, जबकि 18 साल से मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे शिवराज चौहान को अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है। जाहिर है, उनके लिए भी यह रिपोर्ट शर्मनाक है।

यह रिपोर्ट आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, मानव विकास, सामाजिक सुरक्षा, बाल एवं महिला कल्याण, अपराध, कानून व व्यवस्था, न्याय का निस्तारण, पर्यावरण, पार्दर्शिता, वित्तीय प्रबंधन और आर्थिक स्वतंत्रता जैसे मानकों के आधार पर तैयार की गई है। दिलचस्प तथ्य यह है कि यह रिपोर्ट पीरी तरह से सरकारी आंकड़ों पर आधारित है।

झारखंड को लेकर रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि खनिज संपदा से भरपूर होने के बावजूद यह राज्य विकास के मामले में पिछड़ गया है। जबकि औद्योगिकीकरण की शुरआत इसी राज्य से हुई थी । 1907 में टाटा का स्टील प्लांट यहीं लगा था। 18 साल पहले बिहार से अलग होने के बाद उम्मीद की गई थी कि यहां विकास की लहर तेज होगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

विश्व बैंक के मुताबिक झारखंड में 3 करोडड 30 लाख लोग रहते हैं, इन में से 1करोड़ 30 लाख लोग गरीबी में जी रहे हैं। देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले झारखंड में वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या सबसे कम है। इसी तरह बाल मृत्युदर, पोषाहार और स्वच्छता का स्तर भी बहुत नीचे है। देश की कुल खनिज संपदा का 40 प्रतिशत झारखंड में है, लेकिन सिर्फ दस फीसदी का ही इस्तेमाल हो पा रहा है ।

राज्य के इस पिछड़ेपन के लिए किसी के पास कोई जवाब नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि राजनीतिक अस्थिरता के कारण यहां कुशासन की स्थिति पैदा होती रही है। अपने गठन के 18 वर्षों के भीतर इस राज्य ने 10 मुख्यमंत्री देखे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के कारण इस राज्य में सरकारी योजनाओं को ढंग से लागू नहीं किया जा सका और खनिजों के बेहतर उपयोग के लिए औद्योगिक वातारण भी नहीं बन सका।

रिपोर्ट में रघुवर दास सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाये गए हैं। 2014 में बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले रघुवर दास की सरकार भी इस दिशा में बहुत खास नहीं कर पाए हैं। 2016 में पीएसी ने अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी, तब भी झारखंड नीचे ही था।

पीएसी के अध्यक्ष के कस्तूरींरंगन के मुताबिक-यह रैंकिग राज्यों के कामनकाज पर एक सांकेतिक नजरिया भर प्रदान करता है। रिपोर्ट के अनुसार विकास के मामले में बिहार ने बीते कुछ वर्षों में बेशक काफी सुधार दिखाया है, लेकिन अब भी यह राज्य केरल और तमिलनाडु से काफी पीछे है ।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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