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दहेज प्रथा पर लगाम लगाने के लिए झारखंड सरकार ने एकनई पहल शुरु की है। झारखंड में 2,645 दरोगा बहाल हुए हैं। इन नये दरोगाओं को दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र जमा कराना होगा। दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र जमा कराने के बाद हीं उन्हें पुलिस ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को इन प्रशिक्षु दरोगाओं को नियुक्ति पत्र बांटे थे। झारखंड पुलिस में बहाल 2,645 दरोगाओं में 223 महिलाएं भी शामिल हैं। नए बहाल हुए सभी दरोगा की ट्रेनिंग 7 अगस्त से राज्य के तीन पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों झारखंड पुलिस अकादमी, जंगलवार फेयर नेतरहाट और पीटीसी पदमा में शुरू होगी। झारखंड पुलिस को पहली बार सबसे युवा दरोगा अफसरों का बैच मिला है। 2012 तक अधिकतम 40 वर्ष के अभ्यर्थी बतौर दरोगा बहाल होते थे, लेकिन उम्र सीमा घटा दी गई और इसे 30 साल कर दिया गया।

सभी नए दरोगा को 6 अगस्त तक दहेज नहीं लेन देने संबंधी घोषणा पत्र के साथ संबंधित प्रशिक्षण केंद्रों में योगदान देने का आदेश दिया गया है। साथ ही इन्हें मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नव नियुक्त सब इंस्पेक्टरों से कहा कि आप दरोगा बने हैं लोगों की सेवा करने के लिए, रौब दिखाने के लिए नहीं। आजाद भारत में रौब का कोई स्थान नहीं है। क्षेत्र के लोगों के साथ संपर्क बनाकर रखना चाहिए। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बेहतर रहेगी। गरीब जनता ही हमारे लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ है। ये सम्मान के हकदार हैं। उनके प्रति अच्छा व्यवहार रहना चाहिए।

एपीएन ब्यूरो

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