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मौसम की बेरुखी से झारखंड के  किसान परेशान हैं । खासतौर से गिरिडीह के किसान बारिश के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाये हुए हैं ।  खेतों में पड़ रही दरार को देख किसानों का कलेजा फट रहा है । दो माह पूर्व हुई वर्षा से किसानों के चेहरे खिले थे, लेकिन सितंबर व अक्टूबर महीने में बारिश नहीं होने से धान की खेती सूख कर खेतों में दरार पड़ने लगी है ।  किसान पंपिग सेट सेट के सहारे फिलहाल धान को बचाने में लगे हैं। वहीं  जहां पानी की बिल्कुल सुविधा नहीं है। वहां  धान के पौधे मरने लगे है।  किसान बारिश के लिए आसमान की आर निहार रहे हैं।

दरअसल..सितंबर में औसत से कम बारिश होने से किसानों के समक्ष विकट स्थिति पैदा हो गई है।  लोग इस साल औसत से ज्यादा बारिश होने का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन मानसून की बेरूखी ने उनकी उम्मीद तोड़ दी है।

गिरिडीह के जिला कृषि पदाधिकारी धीरेंद्र कुमार पांडेय भी मानते हैं कि कम बारिश के कारण धान की 50 फीसदी फदस प्रभावित हुई  है । गिरिडीह के 3 प्रखंडो  तिसरी, गांवा और बिरनी में 60 से 70 फीसदी धान उत्पादन प्रभावित होगा।

धान की  फसल की हालत देख किसानों की आंखे नम हैं ।और उन्हें इस बात काडर सता रहा है कि मानसून की बेरुखी के कारण इस बार कहीं उनके सामने भूखमरी की स्थिति न आ जाए। किसानों की यह हालत देखकर यह ,सवाल भी उठ रहा है कि ऐसी स्थिति में खेती से किसानों की आय को दोगुना करने का सरकारी सपना आखिर कैसे पूरा होगा ।

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