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गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव परिणामों ने बीजेपी विरोधी गठबंधन की सम्भावनाओं को मजबूती दे दी है। यूपी में जहां सपा और बसपा का गठबंधन काम आया तो बिहार में आरजेडी और कांग्रेस का गठबंधन बीजेपी को रोकने में सफल हो गया। चार सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दल 5 राज्यों से बढ़कर 21 राज्यों की सत्ता पर काबिज हो चुकी है।

बीजेपी के विजय रथ ने विरोधियों को एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है। हालिया सोनिया की डिनर डिप्लोमेसी इसका एक उदाहरण है। राज्यों में भी गठबंधन धर्म का निष्ठतापूर्वक पालन किया जाने के आसार दिख रहे हैं। इन हालातों में गठबंधन को लेकर झारखंड में भी तेजी से बीजेपी के विरूद्ध उम्मीदें बढ़ी हैं।

झारखंड में बीजेपी के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस का गठबंधन तय हो चुका है, जिसमें आरजेडी और झारखंड विकास मंच यानि कि जेवीएम के भी शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस और जेएमएम के गठबंधन से बीजेपी को काफी नुकसान हो सकता है।

27 प्रतिशत आदिवासी मतदाताओं में बीजेपी की अपेक्षा जेएमएम-कांग्रेस की मजबूत पकड़ है। उपचुनावों में गठबंधन और जीत के नतीजों से बीजेपी में निश्चित रूप से बेचैनी बढ़ेगी। आजसू के साथ गठबंधन के कारण सत्ता में है। विपक्ष को गठबंधन के फायदे दिखने लगे हैं। ऐसे में विपक्षी एकजुटता को बल मिलेगा और झारखंड में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेंगी।

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