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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने बुधवार (20 दिसंबर) को बेसिक शिक्षक संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और एनआईओएस ने जवाब में अपना हलफनामा दाखिल किया और पूरे मामले पर अपनी तरफ से स्थिति को स्पष्ट किया। भारत सरकार की तरफ से वकील राजेश त्रिपाठी ने हालफनामे के जरिए कोर्ट को सूचित किया कि सिर्फ कक्षा 1 से 5 तक बच्चों को पढ़ाने वाले प्राइमरी अध्यापकों को ही दूरस्थ शिक्षा विशेष ब्रिज कोर्स से 6 माह का प्रशिक्षण लेना जरूरी है और अप्रैल 2018 से छह माह का यह प्रशिक्षण शुरू होगा। कोर्ट को बताया गया कि बीएड डिग्री वाले कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए यह ब्रिज कोर्स करना ज़रूरी नही है।

उच्च न्यायालय ने जूनियर हाईस्कूल के अध्यापकों के प्रशिक्षण को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 8 हफ्ते में इस संबंध में निर्णय लें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो वह फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकता है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने इस याचिका का निपटारा कर दिया।

याचिका में गैर प्रशिक्षित अध्यापकों की 31 मार्च 2018 के बाद सेवा समाप्त करने को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार ने आदेश जारी किया था कि गैर प्रशिक्षित अध्यापकों की 31 मार्च 2018 के बाद सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता का कहना था कि प्राईमरी टीचरों को दूरस्थ शिक्षा योजना का लाभ दिया गया है और जूनियर हाईस्कूल के अध्यापकों के साथ इसे लेकर भेदभाव किया जा रहा है। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य और केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था। राज्य सरकार का कहना था कि यह केंद्र सरकार की योजना है और उसी को इस पर कोई फैसला लेने का अधिकार है। इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।  

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