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नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (NGT) के जंतर-मंतर पर धरने प्रदर्शन बैन करने के आदेश के खिलाफ सोमवार (22 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस, दिल्‍ली नगर निगम और नई दिल्‍ली म्‍यूनिसिपल काउंसिल को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर धरने-प्रदर्शनों के शोर और अव्‍यवस्‍था फैलने को लेकर NGT में सुनवाई हुई थी जिसमें NGT ने धरने-प्रदर्शन बैन करने का आदेश दिया था साथ ही कहा था कि धरने-प्रदर्शन रामलीला मैदान में किए जा सकते हैं। पंजाब की एक रेप पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दाखिल कर प्रदर्शन की मांग की है…याचिका में कहा गया है कि रामलीला मैदान संसद से दूर है और प्रदर्शन करना हमारा मौलिक अधिकार है।

मजदूर किसान शक्ति संगठन ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सेंट्रल दिल्ली में शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन करने की इजाजत देने के की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि अक्टूबर में NGT ने जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन पर रोक लगा दी जबकि पूरी सेंट्रल दिल्ली में दिल्ली पुलिस की ओर से धारा 144 लगाई गई है। ऐसे में लोगों के शांतिपूर्व प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। उनका ये भी कहना है कि संविधान से मिले मौलिक अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता और दिल्ली पुलिस द्वारा लागू की गई धारा 144 मनमानी और गैरकानूनी है। याचिका में संगठन की तरफ से सुझाव दिया गया है कि इंडिया गेट के पास बोट क्लब पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक तौर पर इजाजत दी जा सकती है।

जंतर-मंतर पर धरने-प्रदर्शनों पर NGT की रोक के फैसले के बाद वहां बरसों से प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटा दिया गया। NGT ने रोक का यह फैसला जंतर-मंतर के पास रिहाईशी इलाके में रहने वाले लोगों की याचिका के बाद दिया था।

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