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झारखंड की एक अदालत ने शुक्रवार (16 मार्च) को एक बड़ा फैसला दिया। अदालत ने गोरक्षा से जुड़े एक हत्या के मामले में 11 कथित गो-रक्षकों  को दोषी करार दिया है। कोर्ट 20 मार्च को मामले में सजा का ऐलान करेगा। देश में ऐसा पहली मरतबा हुआ है जब गो-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा से जुड़े किसी मामले में आरोपियों को दोषी करार दिया गया है।

इस मामले में कुल 11 लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी माना गया है। 11 में से तीन आरोपियों पर धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के आरोप भी साबित हुए हैं। अदालत ने यह माना है कि यह एक पूर्व नियोजित हमला था। दोषियों में एक बीजेपी नेता भी शामिल है।

झारखंड के रामगढ़ में 29 जून 2017 को गो-मांस ले जाने के शक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी नाम के मांस कारोबारी की हत्या कर दी गई थी। असगर अंसारी पर आरोप लगाया गया था कि वो अपनी वैन में करीब 200 किलोग्राम मांस लेकर जा रहे थे। असगर की गाड़ी को आग लगा दी गई थी। पुलिस के बीच-बचाव के बाद असगर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था।

यह घटना रामगढ़ शहर के बाजार टांड इलाके में हुई थी, जिसके बाद जिले में तनाव के हालात बन गए थे जिसे देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल को तैनात किया और आईपीसी की धारा 144 लागू की गई थी। पुलिस ने इस मामले में शुरुआत में एक स्थानीय बीजेपी नेता नित्यानंद महतो समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया था, साथ ही एक अन्य शख्स ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

जिस दिन असगर अंसारी पर हमला किया गया था, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गाय और गोरक्षा के नाम पर कानून हाथ में न लेने की अपील कर रहे थे।

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