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दिल्ली के करोलबाग इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ज़मीन पर बनी 108 फीट ऊंची हनुमान की प्रतिमा के निर्माण के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (20 दिसंबर) को CBI जांच के आदेश दे दिए। CBI इस बात की जांच करेगी कि कैसे सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण कर 108 फीट की मूर्ति बना दी गई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि CBI उन तामाम नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की जांच करे जिनके अधिकार क्षेत्र में उस वक्त यह इलाका आता था।

इससे पहले 15 दिसंबर को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में CBI से जांच कराए जाने के संकेत दे दिए थे। दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने कहा था कि जांच के दायरे में दिल्ली विकास प्राधिकरण, नगर निगम और दूसरे संबंधित विभागों के अफसर भी होंगे जिनकी मूर्ति बनाने के दौरान इस इलाके में तैनाती थी। पीठ ने सवाल किया था कि कैसे बिना अधिकारियों की मिलीभगत से इलाके में सार्वजनिक ज़मीन पर इतनी विशाल मूर्ती का निर्माण किया गया? कैसे अधिकारियों को अपने तहत आने वाले इलाके में इतने बड़े निर्माण की भनक तक नहीं लगी?

अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और इलाके के नगर निगम से उन अधिकारियों के नाम की सूची मांगी थी जो 1995 में इस इलाके में तैनात थे क्योंकि 1995 में ही इस विशाल मूर्ती का निर्माण शुरू हुआ था और 2002 में बनकर तैयार हो गई थी।

नगर निगम ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि मूर्ति के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है और वहां पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को भी रोक दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि वह ट्रस्ट चलाने वालों के खिलाफ जांच कर रही है और ट्रस्ट की फंड के बारे में जानकारी इक्ट्ठा की जा रही है। दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि न मंदिर और न ही ट्रस्ट उन्हें किसी तरह का कोई टैक्स दे रहा है।

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