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रिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा ने शुक्रवार (27 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट की जज के तौर पर शपथ लीं वह सुप्रीम कोर्ट की पहली ऐसी महिला जज हैं जो सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट  की जज बनीं हैं। लेकिन सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के नाम पर मुहर नहीं लगाई और इसे पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम के पास भेज दिया है। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों ने गुरुवार (26 अप्रैल) को आपत्ति जताई और इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने की अधिसूचना पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की। इन वकीलों का कहना था कि सरकार को दोनों नाम मंज़ूर करने चाहिए था या फिर दोनों को कॉलेजियम के पास दोबारा विचार के लिए भेजना चाहिए था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इंदु मल्होत्रा की जज के रूप में नियुक्ति के वांरट पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ये कैसी जनहित याचिका है? हमें हैरानी है कि आपने ऐसी मांग की। बार से कोई जज बन रहा है और बार ही विरोध कर रही है। केंद्र सरकार अगर सिफारिश को वापस भेजती है तो ये उसके अधिकार क्षेत्र में है। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर कॉलेजियम दोबारा इस सिफारिश को भेजता है तो विवाद खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कई बार एक हाईकोर्ट के लिए 30 नाम की सिफारिश की जाती है। 22 को जज बनाया जाता है, 8 नाम कॉलेजियम के पास वापस भेजे जाते हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि 30 के 30 नाम मंज़ूर या नामंज़ूर हों।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ के नाम को सरकार ने पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम के पास भेज दिया है। सरकार का तर्क है कि जस्टिस जोसेफ के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की राह में वरिष्ठता सबसे बड़ी बाधा है। देश भर के हाईकोर्ट में कार्यरत मुख्य न्य़ायाधीशों और जजों की वरिष्ठता सूची में जस्टिस जोसफ काफी नीचे आते हैं। जस्टिस जोसेफ हाईकोर्ट के 669 न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं। सरकार के मुताबिक जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश करते समय कोलेजियम ने वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज कर दिया है। इसी वजह से सरकार ने कॉलेजियम को अपनी सिफारिश पर दोबारा विचार करने को कहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने सरकार पर दखलंदाजी का आरोप लगाया है। विकास सिंह ने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसे सरकार के सामने बहुत ही दृढ़ता से उठाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के कॉलेजियम ने 10 जनवरी को हुई बैठक में इंदु मल्होत्रा और जस्टिस के एम जोसेफ़ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी। जस्टिस के एम जोसेफ़ ने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के केन्द्र के आदेश को रद्द कर दिया था। जस्टिस केएम जोसेफ़ के मामले में सरकार की चुप्पी को लेकर कई जजों ने सवाल भी उठाए थे।

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