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दुनिया के सात अजूबों में से एक और मोहब्बत की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल के संरक्षण को लोकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्यितार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षण और रखरखाव पर सरकारी उदासीनता और लापरवाही पर कहा कि अगर आप इसे संभाल नहीं सकते हैं तो इसे गिरा दीजिए।

ताजमहल के संरक्षण में बरती जा रही लापरवाही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा, ताज को सरंक्षण दो या बंद कर दो या ध्वस्त कर दो। नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रांस के एफिल टावर को देखिए वो सैकड़ों साल पुराना है और लाखों लोग उसे देखने आते हैं। वहां का मैनेजमेंट बहुत अच्छा है लेकिन आप लोग ताजमहल को लेकर गंभीर नहीं है और न ही आपको इसकी परवाह है। कोर्ट ने कहा क् आप टूरिस्टों को लेकर भी गंभीर नहीं है और आपकी वजह से देश का नुकसान हो रहा है।

सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि पर्यावरण मंत्रालय ने एक कमेटी गठित कि है जो ताज के आसपास प्रदूषण के कारणों का पता करेगी और 4 महीने में रिपोर्ट देगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्यों निजी संस्थानों को ताज के आसपास उद्योग लगाने कि इजाजत दी गई। कोर्ट ने कहा कि अगर हमको परेशान किया गया तो हम भी परेशान करेंगे। इस पर सरकार ने कहा कि नए उद्योगों को खोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम अथारिटी यानी TTZ  के चेयरपर्सन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए लिए कहा है और पूछा है क्यों ताज के आसपास उद्योगों का विस्तार हो रहा है और उसके आदेश का पालन क्यों नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने ताज के संरक्षण के लिए विज़न डोकुमेंट नहीं देने पर उत्तर प्रदेश सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट अब 31 जुलाई से रोजाना इस मामले की सुनवाई करेगा।

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