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सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस सी एस कर्णन को छः महीने जेल की सजा सुनाई है। यह सजा सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ ने सुनाई है। देश की न्यायपालिका के इतिहास में यह पहली घटना है जिसमे हाईकोर्ट के एक जज को सजा सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई है। इससे पहले बगावती तेवर अपना चुके कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित सात अन्य जजों को पांच साल की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को जस्टिस कर्णन को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश भी दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने मीडिया के लिए भी आदेश जारी करते हुए कहा है  है कि वह जस्टिस कर्णन के बयान को न चलाये। आज के इस फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन की मानसिक स्वास्थ जांच कराने के आदेश दिए थे। इसकी रिपोर्ट 8 मई तक कोर्ट में जमा करने को कहा गया था। हालाँकि जस्टिस कर्णन ने स्वास्थ जांच से इंकार कर दिया और खुद को पूरी तरह स्वस्थ बताया था। इसके अलावा उन्होंने मुख्य न्यायधीश सहित इस मामले की सुनवाई कर रहे सात अन्य जजों के खिलाफ पांच साल सश्रम कारवास और एक लाख रूपए जुर्माना की सजा का आदेश भी जारी किया था। कर्णन के इस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वस्थ मानते हुए आज सजा का ऐलान कर दिया है।

गौरतलब है कि जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के 20 जजों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये थे। उन्होंने इससे सम्बंधित चिट्ठी प्रधानमंत्री को भी भेजी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। लेकिन कई बार आदेश देने के बाद न तो वह खुद उपस्थित हुए न ही अपने ऊपर लगे अवमानना के आरोपों पर कोई जवाब दिया और तो और अपने घर पर चलाये जा रहे कोर्ट से उन्होंने मुख्य न्यायधीश सहित सात अन्य जजों के खिलाफ ही सुनवाई करनी शुरू कर दी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि उनके पास कहने को कुछ भी नहीं है और आज यह सजा सुना दी गई है।

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