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जेल में जहां कुछ कैदियों को शानदार सुख-सुविधा मिल रही है तो वहीं जेल में बंद कुछ कैदियों के पास बुनियादी जरुरतों की सुविधा भी मुहैया नहीं हो रही है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जेल में कुछ कैदियों को मिल रही शानदार सुविधा और अनेक के पास बुनियादी जरूरतों की भी तंगहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा “आप अपने अधिकारियों को जेल में भेजें। वो जाएं और देखें कि वहां बरसों से दीवारों की रंगाई नहीं हुई है। शौचालय, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी दिक्कत है।”

संजय चंद्रा को मिल रही सुविधाओं का उठा मसला:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “क्या जेलों में एक समानांतर सरकार चल रही है? कैसे कुछ कैदी सोफा, टीवी जैसी सुविधाओं का मज़ा ले रहे हैं? क्या उन्हें जेल में विशेष अधिकार मिले हैं?” ये दोनों टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट की हैं। खास बात ये है कि दोनों एक ही मामले की सुनवाई के दौरान आईं। जेलों की बदहाली पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अचानक दिल्ली की तिहाड़ जेल में यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा को मिल रही सुविधाओं का मसला उठा दिया।

संजय को मिल रही सभी सुख-सुविधाएं:
दरअसल, पिछले दिनों दिल्ली के एक अतिरिक्त जिला जज ने तिहाड़ जेल का दौरा किया था। उन्होंने हाई कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि जेल में संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा को अलग से सुविधाएं मिली हैं। उनकी बैरक में आरामदायक गद्दे, एलईडी टीवी, मिनरल वाटर, नारियल पानी जैसी कई चीजें मिलीं। बैरक को बाहर की धूल और बदबू से बचाने के लिए कंबल और बोर्ड से ढका गया था। रिपोर्ट में जेल के महानिदेशक और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ FIR की भी सिफारिश की गई थी।

जेल में मोबाइल फोन उपलब्ध:
जेलों की बदहाली मामले पर सुनवाई करने बैठी बेंच के अध्यक्ष जस्टिस मदन बी लोकुर ने अखबार में छपी रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने केंद्र की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी से पूछा, “ज़िला जज की रिपोर्ट के बाद क्या कार्रवाई हुई? क्या देश की जेलों में एक समानांतर शासन चल रहा है? हमने तमिलनाडू, बिहार जैसे राज्यों की मीडिया रिपोर्ट भी देखी है। जेल में मोबाइल फोन उपलब्ध है। अपराधी वहीं से गिरोह चला रहे हैं। आप इस बारे में क्या करना चाहते हैं?”

जेलों की बुरी स्थिति से कोर्ट नाराज:
इससे पहले कोर्ट ने जेलों की बुरी स्थिति पर भी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जेल में बंद लोग भी इंसान हैं। उन्हें अमानवीय स्थिति में रहना पड़ रहा है। अपने अधिकारियों को कहिये कि दफ्तर से बाहर निकलें। जेल और सुधार गृह में जाएं। देखें वहां का क्या हाल है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कोर्ट की चिंताओं से सहमति जताते हुए कहा, “इस मामले पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है। हम आपकी चिंता से सहमत हैं। मैं जानकारी जुटा कर जवाब दाखिल करूँगा।” मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में कैदियों की दुर्दशा पर खुद संज्ञान लिया था। इसी मामले पर आज सुनवाई चल रही थी।

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