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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश के 12 राज्यों पर  दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने देश में विधवाओं की दयनीय हालत को देखते हुए इनके आश्रय और पुनर्वास के लिए कुछ दिशा दिशा-निर्देश दिए थे लेकिन राज्यों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इनका पालन नहीं किया। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर 12 राज्यों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। जिन राज्यों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगा है, उनमें  मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गुजरात,उत्तराखंड,मिजोरम, असम, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों को भी नहीं बख्शा है जिन्होंने आदेश का तो पालन किया है लेकिन मामले में आधी-अधूरी सूचना दी है, ऐसे राज्यों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता

देश में विधवा महिलाओं की स्थिति कैसे सुधारी जाए और क्या-क्या कदम उठाये जाने चाहिए इसके बारे में सुझाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक पांच 5 सदस्यीय कमेटी भी इसी साल अगस्त में बनाई थी।  इसमें वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इस कमेटी में एनजीओ जागोरी की सुनीता धर, गिल्ड फॉर सर्विस की मीरा खन्ना, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता आभा सिंघल जोशी, हेल्प एज इंडिया और सुलभ इंटरनेशनल का एक-एक प्रतिनिधि शामिल है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि जिन विधवाओं की उम्र कम है उनके पुनर्विवाह के बारे में भी योजना बनाए । कोर्ट ने यहां तक टिपणी की थी कि विधवा महिलाओं से बेहतर खाना जेल के कैदियों को मिलता है । सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी हैरानी जताई थी कि 18 साल से कम उम्र की लडकियों की शादी कैसे हो सकती है और उनके विधवा होने पर उनका परिवार कैसे उन्हें छोड़ सकता है ।

इस मामले पर अक्टूबर में हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या राज्यों में राज्य महिला आयोग का कोई वजूद है भी या नहीं। इसके अलाव कोर्ट ने इस बात को लेकर राज्यों को आगाह किया था कि वह इस मामले को गंभीरता से लें और चेतावनी भरे लहज़े मे कहा था कि राज्यों को इसका खामयाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

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