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बिहार में शराबबंदी को लगभग दो साल से ऊपर हो गए है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दावा रहा है कि सूबे में शराबबंदी काफी सफल रही है, लेकिन इस दावे की पोल उस वक्त खुल गई जब उनकी सरकार में गठबंधन पार्टी बीजेपी के एक सासंद का बेटा नशे में धुत गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, शनिवार देर रात अवैध शराब के ठिकाने पर छापेमारी के दौरान बोधगया से बीजेपी सांसद हरि मांक्षी के बेटे राहुल मांक्षी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि सांसद का बेटा शनिवार शाम बोधगया के नीमगांव में अपने दोस्तों के साथ शराब पी रहा था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस ने राहुल मांझी का मेडिकल टेस्ट करवाया, जिसमें राहुल के शरीब में शराब के अंश की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने रविवार को राहुल मांझी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

बता दें कि सांसद हरि मांझी ने इस पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका बेटा बेकसूर है। उन्होंने कहा कि शनिवार की रात उनका बेटा अपने एक रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में गया हुआ था और वहीं से वापस लौट रहा था। हरि मांझी का कहना है कि पुलिस ने उसे बेवजह पकड़ लिया। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले उनके बेटे राहुल की स्थानीय लोगों के साथ मारपीट हुई थी और उन्हीं लोगों ने साजिश के तहत उनके बेटे को शराब कांड में फंसा दिया है।

वहीं इस मामले पर राजनीति भी गरमा गई है। कोई इस दलित राजनीति से जोड़ रहा है तो कोई बिहार में शराबबंदी को फेल बता रहा है।

राजद नेता भाई वीरेंद्र ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की ये कैसी शराबबंदी है। पहले होम डिलीवरी होती थी और अब शराब की बेड डिलीवरी हो रही है। राजद का कहना है कि एनडीए नेताओं की जांच कराई जाए तो उनके पास से भी शराब मिलेगी। सरकार शराबबंदी कानून लागू कराने में विफल रही।

इस मामले को आरजेडी के उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी दलित राजनीति से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर शराब पीते कोई दंबग जाति का होता तो उसके साथ ऐसा नहीं किया जाता

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