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वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा को भी संबोधित करते हुए कहा कि 5 वर्ष पहले जब काशी की धरती पर मैंने कदम रखा, तब मैंने कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। मैया ने ऐसा दुलार दिया, काशी के बहन-भाइयों ने इतना प्यार दिया कि बनारस के फक्कड़पन में ये फकीर भी रम गया। ये मेरा सौभाग्य है कि काशी कि वेद परंपरा को ज्ञान के विश्लेषण व तार्किक अनुभवों से जुड़ सका। काशी ने मुझे सिर्फ एमपी नहीं पीएम बनने का आशीर्वाद दिया। मुझे 130 करोड़ भारतीयों के विश्वास की ताकत दी।

पीएम मोदी ने कहा, समर्थ, सम्पन्न और सुखी भारत के लिए विकास के साथ-साथ सुरक्षा अहम है। साथियो, मेरा ये मत रहा है कि परिवर्तन तभी सार्थक और स्थायी होता है, जब जन-मन बदलता है। इस जन-मन को साधने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। मैं मानता हूं कि इस समय भारत भी तपस्या के दौर में है। वो खुद को साध रहा है और इस साधना में हम सब एक सेवक हैं, साधक हैं।

जो सपना मन में है वो पूरा हो गया ऐसा मैं कभी दवा नहीं करता हूँ लेकिन उस सपने को पूरा करने की दिशा में हमारा रास्ता और रफ़्तार सही है ये मैं ज़रूर कह सकता हूँ। काशी के विकास को लेकर हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं उसके तीन पहलू हैं। एक आध्यात्मिक, दूसरा व्यवहारिक और तीसरा मानवीय। ये अलग-अलग भी हैं और एक दूसरे से जुड़े भी हैं।

जब मैं बहुत पहले काशी आया था तो उस समय एयरपोर्ट से शहर तक आने वाले रास्ते को देखकर बहुत पीड़ा हुई थी। शहर में पहुंचा तो बार-बार बिजली के लटकते तारों से सामना हुआ। मन में विचार उठा यहां गंदगी के ढरे क्यों हैं। सही कहूं तो 17 मई 2014 को गंगा तट पर कुछ संकल्प मैं ले रहा था तो मन में ये सवाल जरूर था कि काशी की उम्मीद पर खरा उतर पाउंगा क्या।

लेकिन आज मैं कह सकता हूं कि हम सभी के सामूहिक प्रयास और बाबा के आशीर्वाद से काशी के बदलाव को काशीवासियों समेत पूरा देश अनुभव कर रहा है। बाबरपुर एयरपोर्ट से शहर तक की जिस सड़क की मैंने चर्चा की थी, आज वही सड़क आज बनारस की नई पहचान बन गई है। यहां रेलवे स्टेशनों और सड़कों को सुधारा गया है। लटके तार गायब हो रहे हैं और गंगा घाट में भी अलग ही रौनक है।

अब काशी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बड़ा केंद्र बन रही है। देश के सबसे आधुनिक कैंसर अस्पतालों में से एक अस्पताल अब हमारे काशी में है। अन्य बीमारियों के इलाज के लिए भी अस्पताल बने हैं। कनेक्टिविटी को लेकर तो हमारे विरोधी भी हमारा लोहा मानते हैं। रोडवेज से लेकर एयरवेज तक पूरे देश में अभूतपूर्व काम हो रहा है जिसकी झलक काशी में भी दिखती है।

गंगा जी पर देश का पहला जलमार्ग बनना, वाराणसी में क्रूज जहाजों का चलना ये हमारे पर्यटन और व्यापार के अच्छे संकेत हैं। मां गंगा के ईमानदार सेवक हमारे मल्लाह साथियों को इसका लाभ मिलना निश्चित है। हमारी विरासत, हमारी आस्था के प्रतीक बाबा विश्वनाथ और गंगा मां की सेवा का अवसर मिलना वाकई सौभाग्य है। मां गंगा को निर्मल और अविरल बनाने की दिशा में भी हम काफी आगे बढ़ गए हैं।

गंगा जी में मिलने वाले अनेक नालों को बंद किया जा चुका है। प्रवासी सम्मेलन के दौरान यहां आए सैकड़ों भारतवंशियों ने गंगाजल से जैसे आचमन किया, उससे साफ है कि गंगा की सफाई को लेकर अब सारे सवाल धुल रहे हैं।

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