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बिहार में बीजेपी के 2019 लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों के नाम के ऐलान के साथही ये तय हो गया है कि बीजेपी के “शत्रु” यानि, शत्रुघ्न सिन्हा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों की सजा दे दी गई है। अब सवाल ये है कि सरकार की नीतियों को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले शत्रु भैय्या, पार्टी में हाशिए पर क्यों फेंक दिए गए।

दरअसल, शाटगन की टिकट कटने के सही मायनो में जिम्मेदार खुद शत्रुघ्न सिन्हा हैं। विरोधी मंचों को साझा करना, अपनी ही सरकार को कोसना, अब शाटगन को भारी पड़ गया है। प्रधानमंत्री के मोदी के खिलाफ खुले मंचों से सवाल दागना, शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति में शुमार हो गया था।

हालांकि लगातार शत्रुघ्न सिन्हा की इस पार्टी विरोधी बयानबाजी को लेकर सवाल भी उठ रहे थे कि बीजेपी उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाती। लेकिन जानकारों का मानना है कि बीजेपी उन्हें पार्टी से बाहर कर, शत्रुघ्न सिन्हा को शहीद का दर्जा नहीं देना चाहती थी और यही वजह है कि पार्टी ने टिकट काटकर शत्रुघ्न सिन्हा के पर पूरी तरह से कतर दिए हैं।

अब सवाल ये है कि पटना साहिब से ही चुनाव लड़ने का दावा ठोंकने वाले शत्रु भैय्या क्या करेंगे? बीजेपी के शत्रु क्या कांग्रेस के मित्र बनेंगे, कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेगें या लालू परिवार के प्रति हमदर्दी रखने वाले शत्रुघ्न सिन्हा को RJD अपनी पार्टी की टिकट मुहैया करवाएगी। खैर, इस बात का जवाब भी शायद जल्द की मिल जाएगा।

लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा के पर जिस शातिपूर्ण तरीके से बीजेपी ने कतरे हैं। उससे सबक जरूर लेना चाहिए ऐसे नेताओं को, जो खुद को पार्टी से बड़ा समझते हुए, पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। क्योंकि ऐसे लोग जिस किसी भी दल में हों…वो शत्रु की भांति ही रहते हैं, उनके मित्र बने रहने की संभावनाएं काफी कम हो जाती है।

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