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मध्यप्रदेश में किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरू होते ही फर्जीवाड़े की खबरे सामने आने लगी है। जानकारी के मुताबिक ग्वालियर जिले में किसान ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू होते ही कृषि साख सहकारी समितियों में घोटाले की परतें खुलने लगी हैं।

समितियों की ओर से पंचायत पर ऋणदाताओं की सूची चस्पा की तो ऐसे किसान सामने आए, जिन्होंने ऋण लिया ही नहीं, लेकिन वह कर्जदार हैं। उधर, ऋण प्रदान करने का रिकॉर्ड समितियों को नहीं मिल रहा है।

किसानों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त दर्ज कराई है। किसानों का कहना है कि जब बैंक से कर्ज लिया ही नहीं तो माफी कैसी? जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से किसानों को फसल के लिए ऋण साख सहकारी समितियों के माध्यम से दिया जाता है।

बता दें इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसान ऋण माफी का वादा किया और सत्ता में आने के बाद सबसे पहले किसान ऋण माफी को स्वीकृति दी। अब ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

वही बैंक के अधिकारियों का कहना है बैंक में गबन करने वाली दो समितियों के खिलाफ एफआइआर करा दी है। किसानों की जो आपत्तियां आ रही हैं, उनकी जांच की जाएगी।

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