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17वीं लोकसभा के पहले संसद सत्र से पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का शुक्रवार को राज्यसभा में कार्यकाल खत्म हो गया। वें28 साल तक राज्यसभा सांसद रहे। वह पहली बार 1991 में असम से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। मनमोहन 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहे। 1991 के बाद से यह पहला मौका है जब मनमोहन संसद से बाहर रहेंगे। इस बार मनमोहन के असम से राज्यसभा में चुनकर आने की संभावना कम है।

सरकार-2 का बजट सत्र 17 जून से शुरू हो रहा है। इस बार कोई पूर्व प्रधानमंत्री बजट सत्र के दौरान सदन में मौजूद नहीं रहेगा। एचडी देवेगौड़ा भी लोकसभा चुनाव हार चुके हैं।

लोगों ने मनमोहन सिंह का 28 साल का कार्यकाल खत्म होने पर ऐसे दी अपनी प्रतिक्रिया

असम में राज्यसभा की 2 सीट हैं। इस बार कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना आसान नहीं होगा, क्योंकि असम विधानसभा की 126 में से कांग्रेस के पास सिर्फ 26 सीट हैं। एआईयूडीएफ की 13 सीट हैं। जबकि भाजपा के 60 विधायक हैं। चुनाव में एक सीट भाजपा और दूसरी सीट असम गण परिषद (एजीपी) के हिस्से में आई है। यह दोनों सीट मनमोहन सिंह और एस कुजूर का कार्यकाल खत्म होने से खाली हुई हैं। भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा और एजीपी के बिरेंदर प्रसाद के निर्विरोध चुनाव जीतने की संभावना ज्यादा है।

असम के अलावा 9 अन्य सीटों पर चुनाव होना है। ओडिशा की 4, तमिलनाडु से 1, बिहार और गुजरात में 2-2 सीटों के लिए भी चुनाव होगा। इनमें से सिर्फ गुजरात में ही कांग्रेस की 1 सीट जीतने की उम्मीद है। मनमोहन सिंह पिछली बार 2013 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे

बता दें कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ड़ॉ मनमोहन सिंह का संसद में रहने बेहद जरुरी है। ऐसे में पार्टी उन्हें किसी दूसरे राज्य से संसद भेजने की संभावना तलाशेगी। पार्टी के सामने विकल्प बहुत सीमित हैं। पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री को तमिलनाडु से डीएमके के सहयोग से भी राज्यसभा भेजने का विकल्प तलाश रही है।

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